ईरान में नारों से निकलकर विरोध व्यवस्था बदलो की मांग बन रहा

Iran protests against regime

Sandesh Wahak Digital Desk: ईरान में इन दिनों जो हो रहा है, वह सिर्फ महंगाई-बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन नहीं रह गया है। लगातार 12 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब एक खुली बगावत में बदलता नजर आ रहा है। लोग सड़कों पर उतरकर सीधे इस्लामी सत्ता व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं, और इस बार डर की दीवार टूटती दिख रही है।

कैसा है हाल

तेहरान, मशहद, इस्फहान से लेकर दर्जनों छोटे शहरों तक में हालात गर्म हैं। नारे अब सिर्फ ‘रोटी, कपड़ा, मकान’ तक सीमित नहीं। युवा, महिलाएं, मजदूर और अब मध्यम वर्ग भी खुलकर सामने आ रहा है। सर्वोच्च नेता और पूरी व्यवस्था को ललकारा जा रहा है। सरकारी इमारतें, पुलिस चौकियां और वाहन जनता के गुस्से के निशाने पर हैं।

सरकार की लौह-मुट्ठी का जवाब

सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। इंटरनेट-मोबाइल सेवाएं लगभग बंद हैं। सुरक्षा बलों को खुली छूट दी गई है। दर्जनों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारी की खबरें आ रही हैं। सत्ता यह दिखाना चाहती है कि वह अभी भी मजबूत है।

कौन हैं रेजा पहलवी और क्या है उनकी भूमिका

इस विद्रोह के बीच एक नाम फिर से उभर रहा है रेजा पहलवी। वह ईरान के आखिरी शाह के बेटे हैं और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से निर्वासन में रह रहे हैं। वह खुद को ‘वैध क्राउन प्रिंस’ बताते हैं और मौजूदा सत्ता को अवैध करार देते हुए सेना और जनता से इसका साथ छोड़ने की अपील कर रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें एक वैकल्पिक नेतृत्व के तौर पर पेश कर रहे हैं।

क्या होगा तख्तापलट

यह सबसे बड़ा सवाल है, लेकिन जवाब इतना आसान नहीं। विशेषज्ञों की मानें तो तख्तापलट के लिए सिर्फ जनता का गुस्सा काफी नहीं होता। जरूरत होती है।

संगठित नेतृत्व: अभी विरोध बिखरा हुआ है।

सेना का समर्थन: ईरान की सबसे ताकतवर संस्था ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ अभी भी सत्ता के साथ मजबूती से खड़ी है।

सत्ता के भीतर दरार: फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिल रहा।

रेजा पहलवी की लोकप्रियता ज्यादातर सोशल मीडिया और विदेशों में है। देश के अंदर उनके पास कोई ठोस संगठन या नियंत्रण नहीं है।

क्या लौट सकती है राजशाही

यह एक भावनात्मक कल्पना ज्यादा लगती है। 44 साल की इस्लामी व्यवस्था ने समाज की सोच बदल दी है। नई पीढ़ी स्वतंत्रता तो चाहती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह पुराने शाही परिवार को सत्ता सौंपना चाहे। रेजा पहलवी खुद भी सीधे राजा बनने की बात नहीं करते, बल्कि लोकतंत्र और जनमत संग्रह की बात करते हैं।

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दुनिया पर क्या असल पड़ेगा

ईरान पश्चिम एशिया का एक केंद्रीय देश है। यहां की अस्थिरता का मतलब है।

तेल बाजार में उथल-पुथल

पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ना (इजराइल, अरब देश, ईरान-समर्थित गुट)

अमेरिका, रूस, चीन की बड़ी राजनीति में हस्तक्षेप

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