ट्रंप की गुंडागर्दी पर विश्व जनमत प्रहार करे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के वेनजुएला प्रकरण ने दुनिया को डरा दिया है, दुनिया में जिसकी लाठी, उसकी भैंस की कहावत को सच कर दिया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला पर सैनिक हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया है। अपहरण कर निकोलस मादुरो और उसकी पत्नी को अमेरिका लाया गया है। कहने का अर्थ यह है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अमेरिका के कब्जे में है। डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता को रौंदा है, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण किया है, रौंदा है, बल्कि उसने सयुक्त राष्ट्रसंघ और विश्व अदालत की संहिता का भी अपहरण किया है, रौंदा है, विश्व जनमत के सामने उसने हिटलर शाही उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।
अमेरिका ने घोषणा की है कि उसके सैनिकों ने बहुत सफल कार्रवाई की है, आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुचाया है, सिर्फ वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन को सैनिक निशाना बनाया गया और सावधानी पूर्वक सैनिक कार्रवाई में निकोलस मादुरो और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि निकोलस मादुरो और उसकी पत्नी के साथ न्याय किया जायेगा। उनकी गुनाहों की उन्हें सजा जरूर दी जायेगी, पर उन्हें टैंकों या फिर गोलियों से नहीं उड़ाया जाएगा। उन्हें तत्काल फांसी नहीं दी जायेगी। उन्हें सजा के लिए स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था के अंदर अवसर दिया जाएगा, जहां पर उन्हें बेगुनाही साबित करनी होगी।
अमेरिका के प्रमुख शहर न्यूयार्क में सदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट है। इसी सदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में निकोलस मादुरो और उसकी पत्नी पर मुकदमा चलेगा। अमेरिका के इस कदम का दुनिया में विरोध भी तीव्र हुआ है, डोनाल्ड ट्रम्प की दादागिरी और हिटलर शाही भी स्पष्ट हुई है। खासकर रूस और कोलबिया ने अमेरिका को निशाना बनाया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय चार्टर का घोर उल्लघन है और दुनिया की शांति के लिए बेहद खतरनाक है। कमजोर और विकासशील देशों पर अमेरिकी दबाव और शस्त्र हमले की आशंका भी तेज होती है।

अमेरिका के इस कदम से दुनिया में अराजकता फैलेगी और विश्व युद्ध जैसी स्थितियां भी उत्पन्न होगी। खासकर संयुक्त राष्ट्रसंघ और विश्व न्यायालय की साख और विश्वसनीयता कसौटी पर आ गयी है। इस प्रकरण की सिर्फ आलोचना करने मात्र से संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व न्यायालय की विश्वसनीयता बचने वाली नहीं है।
बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि निकोलस मादुरों का गुनाह क्या है? डोनाल्ड ट्रम्प ने किन कारणों और किन उद्देश्यों से निकोलस को गिरफ्तार करने और उसे सजा देने जैसे खतरनाक कदम उठाने के लिए प्रेरित और मजबूर हुए हैं? डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार और अधिकारी इस खतरनाक कदम के प्रबंधन के लिए आगे आये हैं और रणनीतियां बनायी है, अपना पक्ष भी उजागर किये हैं। अमेरिका के अटार्नी जनरल पामेला बॉड्री साफ तौर पर निकोलस के गुनाह गिनाये हैं और कहा है कि निकोलस अमेरिका के लिए खतरनाक दुश्मन हैं। अमेरिका की संप्रभुत्ता के लिए हिंसक और भस्मासुर हैं। निकोलस ने अमेरिका की संप्रभुत्ता के संहार के लिए साजिशें की है, साजिशों को लगातार आगे बढाते रहे हैं। अमेरिकी युवाओं का संहार करने के लिए उसने कार्य किये हैं। अमेरिका में लगातार मादक दब्यों को अवैध निर्यात कर रहे थे, तस्करी कर रहे थे, नार्को टेरिज्म को सक्रिय रखा था और कोकीन की तस्करी और व्यापार कर रहा था। अवैध घुसपैठियों को लेकर भी अमेरिका की नाराजगी थी।

वेनेजुएला के हजारों लोग प्रतिवर्ष अमेरिका में घुसपैठ कर अराजकता फैलाने का काम करते थे। वेनेजुएला सीमा पर अमेरिका ने बहुत लंबी तार और पक्के दीवार भी खड़ी की थी। अवैध घुसपैठियों को लेकर अमेरिका बार-बार चेतावनी भी देता रहा था। खासकर डोनाल्ड ट्रम्प इस प्रकरण पर कुछ ज्यादा ही गर्म थे और वेनेजुएला की तानाशाही पसंद शासकों को सबक सिखाना चाहते थे। जबकि अमेरिका के इन आरोपों को वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने खारिज किया है और कहा है कि वेनेजुएला अपनी संप्रभुत्ता की रक्षा करने के लिए वह सब करेगा जो आवश्यक है। डेल्सी रोड्रिग्ज ने यह भी कहा है कि हमने अमेरिका का सामना करने के लिए सैनिक शासन लागू कर दिया गया है और हर मोर्चे पर हमारे सैनिक डटे हुए हैं।
निकोलस मादुरों पर सबसे बड़ा आरोप वह है जो अमेरिका जाहिर नहीं कर रहा है। लोकतंत्र का आंदोलन सबसे बड़ा आरोप है। निकोलस के खिलाफ लोकतांत्रिक अभियान चल रहा था। सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका ने लोकतंत्र के समर्थन अभियान को समर्थन और गति दे रहा था। अमेरिका ने चेतावनी दिया था कि लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचले नहीं और लोकतांत्रित आंदोलन के नेताओं का उत्पीड़न भी नहीं करे। इसके साथ ही साथ अमेरिका वेनेजुएला के लोकतांत्रिक नेताओं को आर्थिक सहायता और संरक्षण भी दे रहा था। वेनेजुएला के विपक्षी नेता को शांति का नोबल पुरस्कार भी मिला था।

वेनेजुएला के विपक्षी के नेता मारिया कोरीना मचादो ने निकोलस मादुरो की तानाशाही के खिलाफ अंतहीन संघर्ष किया था और लोकतांत्रिक अभियान को संजीव रखा था। इसी के आधार पर मारिया कोरीना मचादो शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था और दुनिया यह जानी कि वेनेजुएला के अंदर लोकतंत्र के खिलाफ कितनी बड़ी तानाशाही है। मारिया कोसीना मचादो अमेरिकी समर्थक है और डोनाल्ड ट्रम्प की समर्थक है।
मारिया कोसीना मचादो को वेनेजुएला से बाहर निकालने के लिए अमेरिका ने सिक्रेट सैनिक अभियान चलाया था और सफलता पायी थी। मारिया कोसीना मचादो अभी नार्वे में रह रही है और नार्वे से ही निकोलस मादुरों के खिलाफ सक्रिय थी। निकोलस मादुरों की गिरफ्तारी को लेकर मारिया कोसीना मचादो ने खुशी जाहिर कर दी है जो अमेरिका के लिए वरदान जैसा है।
दुनिया का एक वर्ग यह मानता है कि यह खेल तेल का है। वेनेजुएला के पास प्रचुर मात्रा में तेल है। तेल का इतना बड़ा भंडार है कि पानी से भी वहां पर तेल सस्ता है। अमेरिका प्रारंभ में वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता था और तेल भंडार में हिस्सेदारी चाहता था। अमरिका जिस तरह से अरब के देशों के तेल भंडार पर हिस्सेदारी सुनिश्चित की थी और अपनी कंपनियां वहां बैठायी थी तथा लाभर्थी बना था, उसी प्रकार की स्थिति वेनेजुएला के अंदर चाहता था। लेकिन वेनेजुएला का तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार ने अमेरिका की यह इच्छा पूरी नहीं की थी और अमेरिका के सामने तन कर खड़ा हो गया था। अब अमेरिका की वेनेजुएला तेल नीति क्या होगी। अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल निर्यात को प्रतिबंधित कर सकता है। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पहले से ही खराब है। अब वेनेजुएला की आर्थिक स्थिति और भी खराब होगी। वेनेजुलला की जनता भूखे मरने के लिए विवश होगी।

क्या अमेरिका निकोलस मादुरों को फांसी पर लटकायेंगे या फिर सजा सुनिश्चित करेंगे? अंतरराष्ट्रीय संहिता के अनुसार अमेरिका ऐसा नहीं कर सकता है। इस तरह के विवाद के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ और विश्व न्यायालय की व्यवस्था है। पर प्रश्न यह उठता है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ओर विश्व न्यायालय के प्रति अमेरिका का कोई समर्पण है, अमेरिका की कोई प्रतिबद्धता है? इसका उत्तर नहीं में ही है। अगर संयुक्त राष्ट्रसंघ और विश्व न्यायालय के प्रति अमेरिका का समर्पण होता, विश्व न्यायालय के प्रति प्रतिबंद्धता होती तो फिर निकोलस मादुरों का अपहरण अमेरिका नहीं करता?
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अमेरिका ने पहले भी इस तरह का कारनामा कर दिखाया है और संयुक्त राष्ट्रसंघ और विश्व न्यायालय की सहिताओं को रौंदा है। आपको सद्दाम हुसैन की फांसी को याद करना चाहिए। अमेरिका ने अपने अंहकार के लिए सद्दाम हुसैन को फांसी पर लटका दिया था और इराक पर कब्जा कर लिया था। आज भी इराक इसकी सजा भुगत रहा है। इराक के तेल कुओं पर अमेरिका का कब्जा हो गया और अमेरिकी तेल कंपनियां अपनी तिजारी भर रही हैं। अमेरिका की इस कार्रवाई के खिलाफ विश्व जनमत तेज होनी चाहिए। विश्व जनमत ही अमेरिका और डोनाल्ड ट्रम्प की इस तानाशाही और गुंडागर्दी को रोक सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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