Farewell 2025 Poem

जब जाना तय है तो जाओ,
पर जाते क्षण भी हरषाओ।
एक साल में जाना ही था,
मत आँखों में आँसू लाओ।

कभी हँसाया कभी रुलाया,
अपना हर जलवा दिखलाया।
लेकिन जाते-जाते तुमने,
कैसा देश का हाल बनाया।

सन् पच्चीस की शाम सुहानी,
आज लग रही कैसी ज्ञानी।
जाते वक्त संदेशा देती,
करो सुबह की तुम अगुवानी।

नया वर्ष जो आयेगा,
तुमको सुख पहुँचायेगा।
नफरत की दीवार ढहाकर
गीत प्रेम का गायेगा।

तुम पर था संसार फ़िदा,
तुमसे होता आज जुदा।
सन् पच्चीस अति हर्षित मन से,
तुमको करता आज विदा।

डॉ. वीके वर्मा
आयुष चिकित्साधिकारी
जिला चिकित्सालय बस्ती

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