विशाल हृदय, सहजता और सरलता की प्रतिमूर्ति थे प्रो. रज्जू भैया: शिवकुमार

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लखनऊ। प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ विशाल हृदय, सहजता और सरलता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने व्यक्ति के जीवन को गढ़ने का काम किया है। उन्होंने एक साक्षात्कार के समय कहा था कि हम आग्रही और सक्रिय हिन्दू हैं। उक्त बातें कार्यक्रम अध्यक्ष एवं विद्या भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री शिवकुमार ने निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ जन्म स्मृति कार्यक्रम में कहीं। यह कार्यक्रम प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र की ओर से आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अवध प्रांत के सह प्रांत प्रचारक मनोज ने प्रो. रज्जू भैया से जुड़े अपने संस्मरणों को साझा किया।

उन्होंने कहा कि रज्जू भैया बचपन से ही मेधावी थे। आरएसएस में उनको सबसे पहले गटनायक  का दायित्व मिला था। इसके बाद उनकी मुलाकात गुरु जी से हुई, वह उनसे काफी प्रभावित हुये। यहीं से वह नागपुर के लिये चले गये। इसके बाद से उन्होंने अपना पूरा जीवन संघ और राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया मितव्ययी थे, उनके लिये पैसों से अधिक कीमत मूल्यों की थी। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया जब प्रोफेसर थे, तब उनकी फिजिक्स की क्लास में इतिहास और भूगोल के छात्र भी बैठ जाते थे, ऐसे आदर्श शिक्षक के रूप में भी उनकी पहचान थी। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया का जीवन गरिमा से भरा हुआ था, उन्होंने मानवीय मूल्यों का संरक्षण भी किया है। वह दूरदर्शी सोच के व्यक्ति थे।

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कार्यक्रम अध्यक्ष एवं विद्या भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मा. शिवकुमार जी ने प्रो. रज्जू भैया को याद किया और उनके साथ बिताये हुये पलों को साझा किया। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया अपने लिये न्यूनतम और समाज के लिये अधिकतम समय देते थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रो. रज्जू भैया के पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास संकलन योजना के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री मा. संजय जी ने कहा कि रज्जू भैया इतने बड़े व्यक्ति थे, इसके बावजूद सरल और सहज स्वभाव के थे। उन्होंने कहा कि वह ऐसे महापुरुष थे, जिनसे हमने बहुत कुछ सीखा और आगे भी सीखते रहेंगे।

पूर्व आईएएस एवं एमएलसी अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि रज्जू भैया सरल और सहज स्वभाव के व्यक्ति थे। वह चाहते थे कि भारत एक सशक्त और श्रेष्ठ देश बने। उन्होंने कहा कि उनके पद चिन्हों पर चलकर अर्थव्यस्था और तकनीकी शिक्षा में भारत को समृद्ध बनायेंगे। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. श्याम नंदन सिंह ने रज्जू भैया के साथ बिताये हुये पलों को साझा करते हुये उन्हें याद किया। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक तकनीकी महेन्द्र मोदी ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किये।

प्रो. रज्जू भैया के भांजे एवं केजीएमयू के पूर्व चिकित्सक डॉ. गिरीश कुमार सिंह ने रज्जू भैया के बिताये हुये पलों को साझा करते हुये कहा कि वह स्वास्थ्य और शिक्षा की आधुनिक तकनीक को अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते थे। उन्होंने कहा था कि एकल विद्यालय के शिक्षकों को ऐसी ट्रेनिंग दी जाये, ताकि वह खुद अपना प्राथमिक उपचार कर सके। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्रा ने कार्यक्रम में आये अतिथियों का परिचय कराया और कहा कि रज्जू भैया विज्ञान को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प दोहराते थे, उनके संकल्प को विद्या भारती ने आगे बढ़ाने का काम किया है। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश ने प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र की स्थापना कर विज्ञान और तकनीकी शिक्षा से अपने 1100 विद्यालयों को जोड़ने का काम किया है।

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन और वंदना से हुई। इसके उपरांत रज्जू भैया के चित्र पर पुष्पार्चन किया गया। कार्यक्रम का संचालन भारतीय शिक्षा परिषद के सचिव दिनेश ने किया। कार्यक्रम के अंत में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. जय प्रताप जी ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अतिथियों को अंगवस्त्र, मास्क और ‘गोलोक की ओर’ पुस्तक देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर यतीन्द्र, हेमचंद्र, सौरभ मिश्रा, उमाशंकर मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार भास्कर दूबे, सत्यानंद पांडेय, मुकेश बहादुर सिंह, शिव भूषण, कानून मंत्री बृजेश पाठक और प्रो. रज्जू भैया के परिवार के सदस्य सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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