कलिकाल का महाप्रयोग: पुष्कर की मणिवेदिका पीठ पर शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का शंखनाद
तीर्थराज पुष्कर (राजस्थान) / जम्मू: सनातन वैदिक धर्म की समृद्ध परंपरा में, चराचर जगत के कल्याण और वैश्विक शांति के लिए ऋषियों द्वारा समय-समय पर दिव्य याज्ञिक अनुष्ठान होते रहे हैं। इसी पावन श्रृंखला में, राजस्थान के पवित्र तीर्थराज पुष्कर स्थित मणिवेदिका पीठ पर इस कलयुग का प्रथम और ऐतिहासिक ‘शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ’ अत्यंत भव्यता और शास्त्रीय विधि-विधान के साथ आयोजित किया जा रहा है।
इस अलौकिक महायज्ञ के प्रेरणा स्रोत और यज्ञ सम्राट के रूप में विख्यात, परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के दिव्य संकल्प और सान्निध्य में यह अनुष्ठान वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गया है। महायज्ञ का शुभारंभ 08 मार्च 2026 को हुआ और 19 अप्रैल 2026 को विशाल पूर्णाहुति के साथ इसका समापन होगा।
इस पावन अवसर पर, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज के भव्य आगमन ने यज्ञ की दिव्यता को और भी गौरवमयी बना दिया। स्वामी जी ने अपने श्रीमुख से भक्तों को आध्यात्मिक संजीवनी प्रदान करते हुए कहा, यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देना नहीं है, यह हमारे भीतर के अहंकार, विकार और अज्ञान को समर्पित करने का माध्यम है। जब विद्वान ब्राह्मणों के मंत्रों की ध्वनि गूँजती है, तो वह केवल वातावरण को ही नहीं, बल्कि मानव के अंतःकरण को भी पवित्र करती है।
गायत्री माता की कृपा से यह महायज्ञ सभी के जीवन में ज्ञान, शांति और सद्बुद्धि का प्रकाश फैलाए। जहाँ यज्ञ है, वहाँ देवत्व है; जहाँ भक्ति है, वहाँ शक्ति है; और जहाँ गुरु का सान्निध्य है, वहाँ जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार के आयोजन केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कारों की अमूल्य धरोहर हैं।

वैश्विक शांति और आतंकवाद के सर्वनाश का संकल्प
महायज्ञ के बृहद उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय (संस्थापक, श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट और मुख्य न्यासी, श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट) ने बताया कि इस अनुष्ठान का मुख्य लक्ष्य समस्त विश्व में शांति स्थापना, मानसिक शांति, नैतिक जागरण और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद जैसी विनाशकारी प्रवृत्तियों का सर्वनाश करना है। उन्होंने इसे सनातन वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना का एक व%E
