Mahashivratri और भांग का कनेक्शन: सिर्फ नशा नहीं, इसके पीछे छिपा है धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व जैसे ही आता है, एक चीज चर्चा में आ जाती है- भांग। अक्सर लोग इसे सिर्फ मौज-मस्ती और नशे से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरा धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक इतिहास छिपा है। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों भगवान शिव से जुड़े इस पर्व पर भांग का विशेष महत्व है।
हलाहल विष का असर कम करने के लिए हुआ था उपयोग
पौराणिक कथा के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान जब भयंकर हलाहल विष निकला, तो पूरे ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण कर लिया। इससे उनका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया। ऐसी मान्यता है कि भांग, धतूरा और बेलपत्र जैसी चीजों में शीतलता का गुण होता है। देवताओं ने इन्हीं का लेप बनाकर शिव के शरीर पर लगाया, ताकि विष के प्रभाव और शरीर की गर्मी को कम किया जा सके।
शिव के ‘आनंद’ स्वरूप से है जुड़ाव
भगवान शिव को ‘औघड़’ और ‘विरागी’ कहा जाता है। वह सांसारिक मोह-माया से दूर गहरे ध्यान में लीन रहते हैं। भांग को एक ऐसी औषधि माना जाता है, जो एकाग्रता बढ़ाने और मन को भीतर की ओर लगाने में मदद करती है। भक्त इसे शिव के उसी दिव्य आनंद के प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्वयं भगवान शिव भांग नहीं पीते थे।
आयुर्वेद में भी है भांग का महत्व
प्राचीन काल में भांग को एक अहम जड़ी-बूटी माना जाता था। इसे ‘विजया’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है- दुखों और रोगों पर विजय पाने वाली। महाशिवरात्रि फाल्गुन महीने में आती है, जब मौसम बदल रहा होता है। आयुर्वेद के मुताबिक, सीमित मात्रा में भांग का सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त करने और थकान दूर करने में सहायक हो सकता है।
वर्जनाओं से परे हैं शिव
भगवान शिव को ‘पशुपतिनाथ’ कहा जाता है। वह समाज द्वारा त्यागी गई चीजों को भी अपनाते हैं- चाहे वह श्मशान की भस्म हो, सांप हो या धतूरा-भांग। महाशिवरात्रि पर भांग का सेवन यही संदेश देता है कि ईश्वर की नजर में कुछ भी अछूत नहीं है, बशर्ते उसे पवित्र भाव से अर्पित किया जाए।
भ्रम और सच्चाई: शिव नहीं पीते थे भांग
अक्सर लोग समझते हैं कि शिवजी भांग पीते थे, लेकिन यह महज एक भ्रम है। सच्चाई यह है कि भांग का लेप उनके शरीर पर ठंडक के लिए लगाया जाता था। शिव न तो नशा करते हैं और न ही किसी नशीली चीज के आदी हैं। वह ‘योगेश्वर’ हैं, जिनका अपनी इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण है।
नशा नहीं, भक्ति है असली मायने
महाशिवरात्रि पर भांग को ‘प्रसाद’ के रूप में बेहद सीमित मात्रा में लेना चाहिए। यह नशा करने या हुड़दंग मचाने का पर्व नहीं है। भांग का असली उद्देश्य मन को शांत करना है, न कि सुध-बुध खो देना।
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भांग का नशा उतारने के 5 आसान उपाय
खटाई का सेवन करें – नींबू पानी, छाछ, दही या इमली का पना नशा उतारने में सबसे कारगर है।
गुनगुना सरसों तेल – अगर व्यक्ति बेहोशी की हालत में हो, तो 1-2 बूंद गुनगुना सरसों तेल कान में डालें।
देसी घी पिलाएं – शुद्ध देसी घी की थोड़ी मात्रा देने से नशे का असर कम होता है।
अरहर की कच्ची दाल – अरहर की कच्ची दाल पीसकर पानी के साथ पिलाने से भी राहत मिलती है।
चने और संतरा खिलाएं – भुने हुए चने या संतरे का सेवन कराएं।
ध्यान रखें: भांग के नशे में भारी भोजन या मीठी चीजें देने से बचें, इससे नशा और बढ़ सकता है।
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