विरह की वेदना
परदेश गये मोहे छोड़ पिया। सेजीया सूनी मन खिन्न किये।। काटे ना कटे विरहन रतियाँ।...
परदेश गये मोहे छोड़ पिया। सेजीया सूनी मन खिन्न किये।। काटे ना कटे विरहन रतियाँ।...
राह निहारत रैना बीते। नैना अश्रु बहावे।। पीया बिना सखी निंद न आवे। पल पल...