पत्रकारिता

फैक्ट’ और ‘फिक्शन’ एक ही घाट पर पी रहे हैं पानी

प्रो. संजय द्विवेदी भारत में इस समय 1 लाख से ज्यादा समाचार पत्र और पत्रिकाएं प्रकाशित होती...

श्रद्धांजलि लेखः रचना, सृजन और संघर्ष से बनी थी पटैरया की शख्सियत

वे ही थे जो खिलखिलाकर मुक्त हंसी हंस सकते थे, खुद पर भी, दूसरों पर...

मानवाधिकारों की रक्षा पत्रकारिता की प्रतिबद्धता: प्रो. संजय द्विवेदी

नई दिल्ली। ‘एक सुंदर समाज की रचना करने में मीडिया प्रारंभ से ही लगा हुआ...