अमेरिका में गूंजा No Kings का नारा, ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
वॉशिंगटन/लंदन: अमेरिका से लेकर यूरोप के कई बड़े शहरों में इन दिनों No Kings (कोई राजा नहीं) नाम से एक विशाल विरोध प्रदर्शन की लहर चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों और ईरान के साथ जारी युद्ध के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व (Middle East) को अस्थिर कर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में महंगाई, तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक मंदी (Stagflation) का डर पैदा कर दिया है।
अमेरिका के शहरों में जनसैलाब और तनाव
अमेरिका के लगभग हर बड़े हिस्से में लोग इस आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं।
वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क: राजधानी वॉशिंगटन डीसी में प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक विशाल मार्च निकाला। वहीं न्यूयॉर्क में नागरिक अधिकार संगठनों ने ट्रंप सरकार पर जनता को डराने-धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है।
सैन डिएगो और लॉस एंजिल्स: सैन डिएगो में करीब 40 हजार लोग सड़कों पर दिखे, जबकि लॉस एंजिल्स में हालात बेकाबू हो गए। यहाँ पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
इमिग्रेशन नीति के खिलाफ एकजुट हुए। मशहूर अमेरिकी गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने यहाँ Streets of Minneapolis गीत गाकर अपना विरोध दर्ज कराया, जो उन्होंने संघीय एजेंटों की गोलीबारी की घटनाओं पर लिखा है।
90 लाख लोगों के जुटने का अनुमान
आयोजकों का दावा है कि यह आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है। उनके अनुसार, पिछले साल जून में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख लोग शामिल हुए थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा 90 लाख तक पहुँचने का अनुमान है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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यूरोप में भी उठी विरोध की लहर
यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। ब्रिटेन और फ्रांस में लोगों ने नस्लवाद और युद्ध के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इटली की राजधानी रोम में भी हजारों लोगों ने मार्च निकालकर शांति की अपील की।
व्हाइट हाउस प्रोपेगेंडा बताया
विरोध प्रदर्शनों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन्हें वामपंथी फंडिंग नेटवर्क का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि इन रैलियों को आम जनता का असली समर्थन हासिल नहीं है। वहीं कई रिपब्लिकन नेताओं ने भी इन प्रदर्शनों को देश की छवि खराब करने वाला बताया है।
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