SEBI और MCA ने कड़े किए डिस्क्लोजर नियम, टॉप कॉर्पोरेट लॉयर्स की बढ़ी मांग

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Newschuski Digital Desk: भारतीय बाजार नियामक SEBI और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों के लिए नए अनुपालन (Compliance) नियमों की घोषणा की है। इस फैसले के बाद कानूनी सलाहकारों और Corporate Lawyers की भूमिका रातों-रात और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या है नया अपडेट

सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस कोड 2.0 लॉन्च किया है। इसके तहत अब कंपनियों को अपने बोर्ड के निर्णयों, संबंधित पक्ष के लेनदेन (Related Party Transactions) और विदेशी निवेश की जानकारी वास्तविक समय (Real-time) में साझा करनी होगी।

कॉर्पोरेट लॉयर्स के लिए क्यों बढ़ा काम

देश की दिग्गज कानूनी फर्मों का कहना है कि नए नियमों के कारण कंपनियों को अब हर छोटे-बड़े विलय (Merger) और अधिग्रहण (Acquisition) के लिए और भी बारीकी से कानूनी जांच करानी होगी।

जटिल कानूनी प्रक्रिया: नए नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान है, जिससे बचने के लिए कंपनियां बड़े Corporate Lawyers और कानूनी फर्मों के साथ ‘रिटेनरशिप’ बढ़ा रही हैं।

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M&A में उछाल: तकनीकी और स्टार्टअप क्षेत्र में बढ़ते एकीकरण के कारण ‘विलय और अधिग्रहण’ के मामलों में 15% की वृद्धि देखी गई है, जहाँ कॉर्पोरेट लॉयर्स मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

इन क्षेत्रों में बढ़ी मांग

रिपोर्ट्स के अनुसार, फिनटेक (Fintech), ई-कॉमर्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में विशेषज्ञता रखने वाले कॉर्पोरेट लॉयर्स की इस साल सबसे ज्यादा मांग रहने वाली है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत में अपने परिचालन को कानूनी रूप से और मजबूत करने के लिए ‘इन-हाउस’ लीगल टीमों का विस्तार कर रही हैं।

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