जंग ने उड़ाया ट्रैवल सेक्टर का बजट: रोज 5500 करोड़ का नुकसान, भारतीय पर्यटन को लग रहे पंख
Newschuski Digital Desk: मिडल-ईस्ट में जारी जंग ने पूरी दुनिया के टूरिज्म और अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है। ईरान पर हो रहे हमलों और वहां से मिल रहे जवाब के कारण लोग अब विदेश यात्रा के नाम से ही घबरा रहे हैं। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के मुताबिक, इस लड़ाई की वजह से दुनिया भर के टूर एंड ट्रैवल सेक्टर को हर दिन लगभग 5,500 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इजरायल-अमेरिका पर भारी पड़ रहा युद्ध
इजरायल की अर्थव्यवस्था पर इस जंग का बोझ अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो इजरायल अपने लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और फौज पर रोजाना करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। अगर इसमें अमेरिका की सैन्य मदद और युद्ध के कारण बर्बाद हो रही संपत्तियों को भी जोड़ दें, तो अमेरिका और इजरायल को हर दिन 7,500 से 8,000 करोड़ रुपये की चपत लग रही है।

अब पर्यटकों की पहली पसंद बना भारत
भारत के नजरिए से देखें तो यह संकट टूरिज्म का पूरा गणित बदल रहा है। पहले भारत से विदेश जाने वाले हर दो में से एक व्यक्ति दुबई, सऊदी अरब या कतर जैसे देशों का रुख करता था। लेकिन अब वहां के हालात देखते हुए लोगों ने वहां जाना लगभग बंद कर दिया है।
‘पिकयोरट्रेल’ जैसी ट्रैवल कंपनियों का कहना है कि मिडल-ईस्ट की बुकिंग में 60% की गिरावट आई है, वहीं दिल्ली की कई कंपनियों में तो कैंसिलेशन 100% तक पहुंच गया है।

भारतीय पर्यटन स्थलों में जबरदस्त भीड़
विदेश में छाई इस अनिश्चितता का सीधा फायदा भारत के पर्यटन स्थलों को मिल रहा है। ईज माईट्रिप और मेकमाईट्रिप जैसे दिग्गजों का कहना है कि फ्लाइट के टिकट महंगे होने के बावजूद लोग अब कोच्चि, पुरी और अंडमान जैसी जगहों पर जाना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। इन जगहों के लिए पूछताछ में 200% का उछाल देखा गया है।
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वहीं जो लोग विदेश जाने की जिद पर अड़े हैं, वे अब थाईलैंड, जापान और मलेशिया जैसे देशों को चुन रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर यह जंग लंबी खिंची, तो 2026 भारत के अपने टूरिज्म सेक्टर के लिए अब तक का सबसे सफल साल साबित हो सकता है।
तेल संकट ने बढ़ाई महंगाई की टेंशन
जंग का सबसे डरावना पहलू स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता है। दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ईरान ने अपनी धमकी के मुताबिक यह रास्ता बंद कर दिया, तो कच्चा तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि हर चीज की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
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