विरहन की व्यथा

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Arvind Sharma
अरविन्द शर्मा (अजनवी)

राह निहारत रैना बीते।
नैना अश्रु बहावे।।
पीया बिना सखी निंद न आवे।
पल पल याद सतावे।।

पतझड़ बीत बसंत आइ गयो।
मंद पवन अब डोले।।
भौंरा गुंजन करे फूल पर।
कोयल बगीया बोले।।

साजन का संदेश लिये।
नित काग मुन्डेरा आवे।।
पीया बिना सखी निंद न आवे।
पल पल याद सतावे।।

मन की व्यथा न जाने प्रियतम।
बेदर्दी निर्मोही।।
अंतर्मन मेें विरह की ज्वाला।
देख सके ना कोई।।

गेहूंआ बदन तपन सह-सह के ।
श्यामल रंग चढ़ावे।।
पीया बिना सखी निंद न आवे।
पल पल याद सतावे।।

चाँद चाँदनी करे ठीठोली।
देखि जिया मोर डोले।।
कब आयेंगे साजन तेरे।
कंगना पायल बोले ।।

निंद ले गई याद पीया की।
स्वप्न सखी नही आवे।।
राह निहारत रैना बीते।
नैना अश्रु बहावे।।

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