हर्षा रिछारिया का लव जिहाद पर बड़ा खुलासा, फरिश्ता बनकर आते हैं और फिर शुरू होता है ब्रेनवॉश
Newschuski Digital Desk: महाकुंभ के दौरान साध्वी के रूप में मशहूर हुईं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने एक लंबे अंतराल के बाद एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। मध्य प्रदेश के उज्जैन से शेयर किए गए इस 2 मिनट 33 सेकंड के वीडियो में हर्षा ने लव जिहाद की कथित रणनीति और हिंदू समाज की कमियों पर तीखा हमला बोला है।
मोहम्मद अशहर का मेल और हितैषी बनने का खेल
हर्षा ने अपने वीडियो में एक मुस्लिम युवक मोहम्मद अशहर की आईडी से आए ईमेल के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। वीडियो की शुरुआत में उन्होंने साफ कहा, मैं जो बताने जा रही हूं, उससे बहुत से लोगों को मिर्ची लग सकती है, लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता।
हर्षा के मुताबिक, उस शख्स ने मेल में उनकी खैरियत पूछी और सोशल मीडिया से दूरी बनाने का कारण पूछा। मेल में लिखा था- हर्षा, ये नेम-फेम और फॉलोअर्स तो ठीक हैं, लेकिन इससे घर नहीं चलता। भविष्य का क्या प्लान है? तुम मुझसे शेयर कर सकती हो।
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हर्षा ने इसे लव जिहाद की शुरुआती चाल बताते हुए कहा, शुरुआत ऐसे ही होती है। उसने मुझे पाखंडी नहीं कहा, बल्कि मेरा हितैषी (Well-wisher) बन गया।
हर्षा ने हिंदू धर्मगुरुओं और समाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हमारे अपने धर्म के लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं, तो दूसरे लोग उस ‘कमजोर मानसिक स्थिति’ को पहचान लेते हैं।
ब्रेनवॉश की प्रक्रिया: उन्होंने कहा, वे फरिश्ता बनकर आते हैं, रहम और प्रेम दिखाते हैं। बस यहीं से ब्रेनवॉश शुरू होता है। मैं इसे अपने ही धर्म की कमी मानती हूं कि हम अपनों को संभाल नहीं पाते।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
हर्षा के इस वीडियो पर लोगों की मिली-जुली लेकिन तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक यूजर ने लिखा, सही कहा आपने, ये हमदर्द बनकर ही आते हैं। आप पर गर्व है। वहीं एक अन्य ने लिखा, आपकी जागरूकता की वजह से आप बच गईं, वरना न जाने कितनी हिंदू बहनों का शोषण हुआ है।

कौन हैं हर्षा रिछारिया
मूल निवास: मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली हैं, वर्तमान में ऋषिकेश (उत्तराखंड) में रहती हैं।
पहचान: पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान साध्वी के वेश में उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं।
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विवाद: महाकुंभ के शाही स्नान में शामिल होने पर कई बड़े धर्मगुरुओं ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उन्हें कुंभ छोड़ना पड़ा था।
उपाधि: वे खुद को हिंदू सनातन शेरनी और सामाजिक कार्यकर्ता बताती हैं। वे निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की शिष्या के तौर पर भी जानी जाती हैं।
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