स्वतंत्रता सेनानी और भोजपुरी के अनमोल रत्न मोती बीए की 17वीं पुण्यतिथि पर साहित्यकारों का जमघट
Deoria News: नागरी प्रचारिणी सभा के सभागार में आज भोजपुरी माटी के गौरव, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रख्यात साहित्य-मनीषी मोती बीए (मोतीलाल उपाध्याय) की 17वीं पुण्यतिथि अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर जनपद और आसपास के क्षेत्रों से जुटे साहित्यकारों, शिक्षाविदों और काव्य-प्रेमियों ने कविवर के चित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके कालजयी रचना संसार को याद किया।
कार्यक्रम में स्वर्गीय मोती बीए के सुपुत्र अंजनी उपाध्याय, पूर्व प्राचार्य दिवाकर प्रसाद तिवारी, पूर्व प्राचार्य इंद्र कुमार दीक्षित, वरिष्ठ कवि सौदागर सिंह, वरिष्ठ कवि दयाशंकर कुशवाहा, व्यवसायी संजय कनोडिया और नागरी प्रचारिणी सभा के मंत्री अनिल कुमार त्रिपाठी सहित प्रार्थना राय, पार्वती देवी एवं श्वेता राय जैसे कई वरिष्ठ व युवा रचनाकार उपस्थित रहे।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मोती बीए केवल एक कवि नहीं, बल्कि भोजपुरी लोक-संस्कृति और मानवीय मूल्यों के सजग प्रहरी थे। उनकी रचनाएँ सीधे जन-संवेदनाओं से जुड़ी थीं। सभा में उनके उस प्रसिद्ध मुक्तक को ससम्मान याद किया गया जो ग्रामीण जीवन के संतोष को परिभाषित करता है:
“दालि रोटी आ माठा जो मीलल करी
जबले गमछा में भूजा आ भेली रही
तेल सरसों के बुकवा जो लागल करी
अपनी किस्मत पर झंखत चमेली रही।”
वक्ताओं ने उनकी वैचारिक दृढ़ता को रेखांकित करते हुए उनके इस शेर को भी उद्धृत किया, “कलम जिन्दा नहीं होती तो कब का मर गया होता, पहुँचने की जगह घर पर, खुदा के घर गया होता।”
1 अगस्त, 1919 को बरहज के बरेजी ग्राम में जन्मे मोती बीए ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने लाहौर और मुंबई के फिल्म जगत में 50 से अधिक फिल्मों के लिए गीत लिखे, लेकिन चकाचौंध को त्याग कर वे अपनी जन्मभूमि लौट आए और अध्यापन व समाज सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
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नागरी प्रचारिणी सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंद्र कुमार दीक्षित ने बताया कि उनकी रचनाएँ ‘मोती बी.ए. रचनावली’ के नौ खंडों में प्रकाशित हो चुकी हैं। शेष अप्रकाशित कृतियों को उनका परिवार और ‘मोती बी.ए. ट्रस्ट’ संरक्षित कर रहा है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित साहित्यकारों ने संकल्प लिया कि मोती बी.ए. की वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक ले जाया जाएगा। सभा ने अपने इस ‘साहित्यिक लाल’ पर गर्व व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
रिपोर्ट- अरविंद शर्मा
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