ईरान में आंदोलन को कुचलने के लिए खौफनाक बासिज बल तैनात, 500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा
Newschuski Digital Desk: ईरान में महंगाई के खिलाफ जारी जनाक्रोश को कुचलने के लिए सरकार ने अपना सबसे खूंखार हथियार मैदान में उतार दिया है। “बासिज” नाम का यह अर्धसैनिक बल, जिसे 2 करोड़ से ज्यादा स्वयंसेवकों वाला दुनिया का सबसे बड़ा मिलिशिया समूह कहा जाता है, आंदोलनकारियों पर टूट पड़ा है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एजेंसी (HRANA) के अनुसार, इस कार्रवाई में अब तक 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।
क्या है बासिज
बासिज एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है लामबंदी या संगठित करना। इसकी स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद की गई थी। इसके संस्थापक अयातुल्लाह खुमैनी का मानना था कि यह संगठन हमेशा ईरान को अमेरिकी प्रभाव से बचाएगा। इसमें ज्यादातर ग्रामीण और रूढ़िवादी पृष्ठभूमि के लोगों को भर्ती किया जाता है और इसे ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नियंत्रित करती है। 2009 और 2022 में भी इसी बल ने सरकार विरोधी आंदोलनों को कुचला था।
من يحرق بيوتَ الله ويعتدي على مؤسساتِ الشعب، فليس ثائرًا ولا مصلحًا، بل أداةٌ رخيصة بيد أعداء الأمة، ينفّذ أجنداتٍ صهيونية بغطاء الفوضى والشعارات الكاذبة.
مع الجمهورية ضد الاستكبار العالمي pic.twitter.com/lIapbUMZBd
— أبو عزرائيل – Abu Azrael (@abu_azrael78) January 11, 2026
क्यों उतारा गया बासिज
ईरान में 27 दिसंबर 2025 से महंगाई और आर्थिक समस्याओं के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं। शुक्रवार (9 जनवरी) को सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका का एजेंडा बताया और कहा कि ईरान किसी के सामने नहीं झुकेगा। इसके तुरंत बाद, संसद की सिफारिश पर बासिज बल को सड़कों पर उतार दिया गया ताकि हिंसक ढंग से आंदोलन को कुचला जा सके।
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राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने माना कि प्रदर्शनकारियों की मांग जायज है, लेकिन कुछ दंगाइयों ने आंदोलन को हाईजैक कर लिया है। अमेरिका ने बासिज बल और उसके कमांडरों पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा है और इसे एक खूंखार संगठन मानता है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान में अत्याचार जारी रहा, तो अमेरिका सैनिक भेज सकता है।
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