यूपी में विकास बजट खर्च करने में विभाग फेल, 32.55% धनराशि अप्रयुक्त रही
Lucknow News: उत्तर प्रदेश सरकार की विकास कार्यों को रफ्तार देने की कोशिशें विभागों की उदासीनता के चलते धरी की धरी रह गईं। पिछले वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों के लिए आवंटित 2.59 लाख करोड़ रुपये में से केवल 1.75 लाख करोड़ रुपये (67.45 प्रतिशत) ही खर्च हो पाए।
इसका मतलब है कि विकास के लिए रखी गई कुल धनराशि की 32.55 प्रतिशत राशि का उपयोग नहीं हो पाया। यह स्थिति उस समय देखने को मिली है जब अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं।
किन विभागों ने लगाई दीवार
कई विभाग ऐसे रहे जो आवंटित बजट का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाए। इनमें शामिल हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
पीडब्ल्यूडी (भवन)
सिंचाई (निर्माण)
कारागार
मत्स्य
डेयरी उद्योग
हैंडलूम
इन विभागों ने मारी बाजी
वहीं, कुछ विभागों ने अपने बजट का 90 प्रतिशत से अधिक खर्च करके बेहतर प्रदर्शन किया।
स्वास्थ्य (परिवार कल्याण)
गृह (होमगार्ड)
समाज कल्याण (दिव्यांगजन)
तकनीकी शिक्षा
पर्यटन
मुख्यमंत्री की समीक्षा के बावजूद ख्वाब अधूरा
प्रदेश सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों की गति सुस्त रहने को गंभीरता से लिया है। समय-समय पर मुख्यमंत्री खुद विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते रहे। शीर्ष स्तर पर लगातार बैठकें होती रहीं, लेकिन इसके बावजूद विकास बजट का 100 प्रतिशत खर्च करने का ख्वाब पूरा नहीं हो पाया।
अब क्या होगा
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी से विभागों से उनकी कार्ययोजनाएं मांगी जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य अगले महीने से विकास योजनाओं का काम तेजी से शुरू कराने का है।
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एक नजर में आंकड़े (वित्तीय वर्ष 2025-26)
मद राशि
कुल बजट ₹8,79,935.44 करोड़
कुल खर्च ₹6,61,200.87 करोड़ (75.1%)
पूंजीगत व्यय (विकास कार्य) – कुल आवंटन ₹2,59,487.38 करोड़
पूंजीगत व्यय (विकास कार्य) – कुल खर्च ₹1,75,013.35 करोड़ (67.45%)
राजस्व व्यय – कुल आवंटन ₹6,20,448.05 करोड़
राजस्व व्यय – कुल खर्च ₹4,86,194.51 करोड़ (78.36%)
यूपी में विकास का पैसा खर्च करने में पीछे रह गए विभाग: 32% फंड रह गया बेकार
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