भोंदू बाबा ने 46 साल पहले भी किया था अपनों का शिकार, 15 साल तक गायब रहने का गहरा राज
नासिक: खुद को आध्यात्मिक बताने वाले अशोक खरात का मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका है। यौन शोषण के आरोपों में घिरे इस ढोंगी बाबा के अतीत से एक ऐसा काला सच बाहर आया है, जिसने सबको सुन्न कर दिया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि खरात का यह ‘गंदा खेल’ आज का नहीं, बल्कि 46 साल पुराना है। 1980 में महज 20 साल की उम्र में उसने अपनी ही एक रिश्तेदार को अपनी हवस का शिकार बनाया था।
1980 का कांड: ताबीज के नाम पर दिया था धोखा
अशोक खरात (जिसे तब लक्ष्मण के नाम से जाना जाता था) की नीयत शुरू से ही खराब थी। अहिल्यानगर जिले के कोपरगांव में उसने अपनी ही एक दूर की रिश्तेदार महिला को अपनी जालसाजी में फंसाया। उस महिला को संतान नहीं हो रही थी, जिसका फायदा उठाकर इस पापी ने ताबीज और पूजा-पाठ के नाम पर उसके साथ घिनौनी हरकत की। जब गांव वालों को इस करतूत का पता चला, तो उन्होंने इसकी जमकर धुनाई की। बदनामी और पुलिस के डर से खरात रातों-रात गांव छोड़कर भाग निकला।

15 साल का मिस्ट्री वनवास
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गांव से भागने के बाद वह अगले 15 सालों तक पूरी तरह गायब रहा। इस दौरान वह कहाँ था, क्या कर रहा था और किसके संरक्षण में था, यह आज भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। जब वह 15 साल बाद वापस लौटा, तो उसका हुलिया और नाम (अशोक खरात) दोनों बदल चुके थे। पुलिस को शक है कि इसी अज्ञातवास के दौरान उसने बाबा बनकर लोगों को ठगने और सम्मोहित करने के गुर सीखे।
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पुलिस खंगाल रही है पुराने रिकॉर्ड
अशोक खरात के अतीत की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, पुलिस अब उन 15 सालों की कड़ियां जोड़ने में जुट गई है। माना जा रहा है कि इस दौरान उसने कई और महिलाओं को भी अपनी ठगी का शिकार बनाया होगा। उसके बचपन से ही आपराधिक और शातिर दिमाग होने के सबूत अब साफ नजर आने लगे हैं।
जांच का दायरा बढ़ा: पुलिस अब उन सभी इलाकों के रिकॉर्ड खंगाल रही है जहाँ खरात के रहने की संभावना थी। 46 साल पुराने इस केस के सामने आने के बाद अब उसकी जमानत की राहें लगभग बंद हो गई हैं।
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