Basti News: योग सिर्फ शरीर नहीं, जीवन जीने की कला है

The true meaning of yoga

Basti News: योग सिर्फ एक शारीरिक कसरत नहीं, बल्कि हमारे देश की हजारों साल पुरानी एक समृद्ध जीवन पद्धति है। वेदों से लेकर ऋषि-मुनियों की तपस्या तक, योग का उल्लेख हमारे प्राचीन ग्रंथों में गहराई से मिलता है। यह हमें न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊंचाई भी देता है।

क्या कहते हैं महान ग्रंथ

पतंजलि योगदर्शन के अनुसार, “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” यानी मन की चंचलता पर नियंत्रण ही योग है।

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, “योगः कर्मसु कौशलम्” यानी हर काम को कुशलता और समर्पण से करना ही योग है।

इन उक्तियों से साफ है कि योग सिर्फ आसन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला और दर्शन है।

अष्टांग योग: आत्म-सुधार के आठ चरण

योग की पूर्णता के लिए अष्टांग योग यानी आठ अंगों का पालन जरूरी माना गया है। ये आठ चरण हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इनका उद्देश्य हमारे मन को अज्ञान के प्रवाह से हटाकर ज्ञान की ओर ले जाना है।

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पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण: यम

इन आठ चरणों में सबसे पहला है यम। बस्ती स्थित संकल्प योग वैलनेस सेंटर, कटेश्वर पार्क के योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह बताते हैं कि ‘यम’ शब्द का अर्थ है ‘निवृत्त होना’ या ‘छूट जाना’। यह एक नैतिक आचार संहिता है, जिसका पालन करने से व्यक्ति दुखों से मुक्त होता है और समाज में एक अनुशासित, सदाचारी जीवन जी पाता है। डॉ. सिंह के अनुसार, यम हमें समाज में रहने का सही तरीका सिखाता है और हमारे चरित्र को शुद्ध करता है। यम के पांच प्रकार होते हैं, जिनके बारे में हम आगे विस्तार से जानेंगे।

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