अतीक अहमद का दफ्तर जहां कदम रखने से लोग खाते थे खौफ, अब गंदगी बनी पहचान
Prayagraj News: कभी अतीक अहमद का कार्यालय उत्तर प्रदेश की सियासत और अपराध की दुनिया का केंद्र हुआ करता था। जहां कदम रखने से पहले लोग तीन बार सोचते थे। वही दफ्तर आज एक दयनीय हालत में है। गंदगी, जर्जर दीवारें और स्थानीय लोगों द्वारा खुलेआम टॉयलेट के तौर पर इस्तेमाल किया जाना इस इमारत की मजबूर दास्तान बयां कर रहा है।
प्रयागराज के चकिया स्थित इस कार्यालय को कभी माफिया का सचिवालय कहा जाता था। आज इसी दफ्तर के कमरों में कूड़ा-करकट फैला है और दीवारों पर दरारें हैं। सोशल मीडिया पर इस बदहाली का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे वो जगह जहां पहले सियासी बैठकें और गुपचुप मुलाकातें होती थीं, अब खुले में शौच का अड्डा बन चुकी है।
नाम सुनते ही कांपते थे लोग
स्थानीय लोगों के मुताबिक, उस वक्त इस भवन के आसपास से गुजरना भी लोगों के लिए मुश्किल होता था। आसपास रहने वाले बुजुर्ग बताते हैं, यहां आने-जाने वालों पर पैनी नजर रखी जाती थी। साधारण लोग इस इलाके से दूर रहते थे। दबंगई और जबरदस्ती की घटनाओं के कारण यह परिसर खौफ का प्रतीक बन गया था। लेकिन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के मारे जाने के बाद से यहां के हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

गैंगस्टर एक्ट के तहत किया गया था कुर्क
इस कार्यालय को पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कर दिया था। माफिया के खात्मे के बाद प्रशासन ने इस इमारत की न तो सुरक्षा की व्यवस्था की और न ही सफाई कराई। धीरे-धीरे यह जगह उजड़ती चली गई।
दीवारें टूट रही हैं, दरवाजों के कब्जे उखड़ चुके हैं, और कमरों में जगह-जगह गंदगी फैली है। लोग इन कमरों का इस्तेमाल खुले में शौच के लिए कर रहे हैं। वायरल वीडियो में इस बदहाली के चौंकाने वाले दृश्य देखे जा सकते हैं।
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इसी दफ्तर से मिली थी पाकिस्तानी पिस्टल
यह वही कार्यालय है, जहां से अतीक अहमद के खात्मे के बाद पुलिस ने विदेशी पिस्टल समेत हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया था। तब पुलिस ने दावा किया था कि ये हथियार पाकिस्तानी थे, जिससे अतीक के पाकिस्तानी कनेक्शन के होने की आशंका जताई गई थी। आज उसी पाकिस्तानी कनेक्शन की चर्चा तो हो रही है, लेकिन उसी सिलसिले का यह गढ़ अब खुद मलबे और गंदगी में तब्दील है।
प्रशासन पर लग रहे आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस भवन की कोई मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। न तो सफाई हो रही है, न ही सुरक्षा। इस वजह से यह जगह गंदगी का अड्डा बन चुका है। जिस इमारत के आगे से लोग डर के मारे गुजरने से कतराते थे, आज वहां लोग मल-मूत्र करने में संकोच नहीं करते। यह कहानी सिर्फ एक इमारत के बदलते हालात की नहीं, बल्कि समय की धारा के सबसे कड़वे सच की भी है।
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