चित्रकूट धाम श्रीराम मंदिर में स्वामी शिवाधर दुबे महाराज का आगमन, भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा की नई कार्यकारिणी घोषित

Swami Shivadhar Dubey Maharaj

Panipat News: ‘शस्त्रे शास्त्रे च कौशलम्’ के सनातन आदर्श को आत्मसात करते हुए भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा द्वारा विप्र समाज की एकजुटता और संस्कृति के संरक्षण हेतु एक विशेष अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। यह भव्य कार्यक्रम वार्ड नंबर 08 स्थित ऐतिहासिक चित्रकूट धाम श्रीराम मंदिर, श्रीराम चौक के पावन प्रांगण में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में सनातन धर्म के ध्वजवाहक, श्री गुरु शिवधर दुबे ट्रस्ट के संस्थापक व सचिव तथा महासभा के राष्ट्रीय प्रभारी परम पूज्य स्वामी श्रीगुरु शिवाधर दुबे महाराज मुख्य अतिथि के रूप में पधारे। स्वामी के आगमन पर श्रद्धालुओं एवं कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा कर उनका भावुक स्वागत किया।

विप्र समाज की एकजुटता और स्वाभिमान पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी श्रीगुरु शिवाधर दुबे महाराज ने कहा कि ब्राह्मण समाज अनादि काल से ज्ञान, संस्कार और धर्म का संवाहक रहा है। उन्होंने कहा, वर्तमान दौर में समाज की अटूट एकता, स्वाभिमान की रक्षा और निर्बल वर्गों का संरक्षण ही हमारा परम कर्तव्य है। स्वामी के प्रेरणादायी और दूरदर्शी विचारों ने उपस्थित कार्यकर्ताओं में समाज-सेवा की नई ऊर्जा का संचार किया।

Swami Shivadhar Dubey Maharaj

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के नए पदाधिकारियों की घोषणा

संगठन को जमीनी स्तर पर अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने के लिए स्वामी जी के सानिध्य में नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की अधिकृत घोषणा की गई। इसमें अनिल कुमार पाण्डेय को प्रदेश अध्यक्ष (हरियाणा), वीरेंद्र कुमार को प्रदेश उपाध्यक्ष (हरियाणा), परशुराम अवस्थी को प्रदेश उपाध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) तथा सन्तोष शर्मा को जिला अध्यक्ष (पानीपत, हरियाणा) का दायित्व सौंपा गया।

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माता-पिता का वंदन और समाज सेवा का संकल्प

राष्ट्रीय प्रभारी व वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नवनियुक्त प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके माता-पिता के संस्कारों को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि यह उपलब्धि उन तपस्वी माता-पिता की ही देन है, जिन्होंने अपनी संतान को समाजोत्थान के इस महा-यज्ञ में समर्पित किया। कार्यक्रम के समापन पर नवनियुक्त पदाधिकारियों ने भगवान श्री परशुराम के चरणों में नतमस्तक होकर सत्य, न्याय और विप्र समाज के कल्याण के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने का संकल्प लिया। पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।

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