UP MLC Election: यूपी में कैसे चुने जाते हैं MLC और कितनी मिलती है सैलरी
UP MLC Election: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर मतदान की तारीख का ऐलान कर दिया है। इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। बता दें कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सदस्य होते हैं, जिन्हें एमएलसी कहा जाता है।
विधानसभा और विधान परिषद में यह है अंतर
उत्तर प्रदेश में दो सदनों वाली विधायिका है। इसमें विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद भी शामिल है। विधानसभा सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जबकि विधान परिषद सदस्य छह वर्ष तक अपने पद पर रहते हैं। दोनों सदनों के चुनाव की प्रक्रिया में भी जमीन-आसमान का अंतर है। विधान परिषद का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं कराया जाता।
अप्रत्यक्ष तरीके से चुने जाते हैं एमएलसी
विधान परिषद सदस्यों का चयन अप्रत्यक्ष मतदान के जरिए होता है। इन्हें विधायक, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, शिक्षक और स्नातक मतदाता चुनते हैं। इसके अलावा कुछ सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। एमएलसी बनने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए।
सीटों का गणित समझिए
यूपी विधान परिषद की 100 सीटों में से एक तिहाई यानी 38 सदस्यों को विधायक चुनते हैं। वहीं 36 सदस्यों का चुनाव नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और क्षेत्रीय पंचायतों के सदस्य करते हैं। परिषद के 8 सदस्य शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से और 8 सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने जाते हैं। शेष 10 सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा नामांकन के जरिए होती है।
एमएलसी को मिलती हैं ये सुविधाएं
उत्तर प्रदेश में एमएलसी को विधायकों के बराबर वेतन और सुविधाएं दी जाती हैं। अगस्त 2025 में राज्य विधानमंडल सदस्य और मंत्री सुविधा कानून (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद उनके वेतन में बढ़ोतरी की गई थी। एमएलसी को मासिक सैलरी, चिकित्सा भत्ता और निर्वाचन क्षेत्र भत्ता मिलाकर हर महीने करीब 2.66 लाख रुपये प्राप्त होते हैं।
यात्रा और अन्य भत्तों का विवरण
एमएलसी को स्टेशनरी के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। यात्रा भत्ते के तौर पर राज्य के भीतर 20 रुपये और बाहर 25 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान होता है। दैनिक भत्ते की बात करें तो राज्य के अंदर 2000 रुपये और बाहर 25 हजार रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। इसके अलावा उन्हें हर माह 2000 यूनिट बिजली मुफ्त और पांच लाख रुपये तक के हवाई यात्रा कूपन भी दिए जाते हैं।
विकास निधि और अन्य सुविधाएं
प्रत्येक एमएलसी को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए सालाना पांच करोड़ रुपये की निधि मिलती है। उन्हें मुफ्त चिकित्सा, सरकारी आवास या किराया भत्ता और कार्यालय खर्च के लिए भी राशि उपलब्ध कराई जाती है। हर महीने 30 हजार रुपये सचिव भत्ते के रूप में अलग से दिए जाते हैं।
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देश में केवल छह राज्यों में विधान परिषद
भारत में सिर्फ छह राज्यों में विधान परिषद मौजूद है। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में यह व्यवस्था है। नियम के अनुसार विधान परिषद की सदस्य संख्या विधानसभा की कुल सीटों के एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती। यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं, इसलिए यहां विधान परिषद में अधिकतम 134 सदस्य ही हो सकते हैं। हालांकि कम से कम 40 सदस्यों का होना अनिवार्य है। वर्ष 2022 में 40 साल बाद यूपी विधान परिषद में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला था, जब बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा छुआ था।
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