भीख मांगकर जीवन गुजारने वाली बुजुर्ग की मौत के बाद कमरे से मिले लाखों रुपये, बोरों में भरे थे सिक्के और नोट
Newschuski Digital Desk: कर्नाटक के मांड्या जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां जीवनभर भीख मांगकर गुजारा करने वाली एक 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उनके घर से लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई है। किराए के मकान में अकेले रहने वाली हूर नामक महिला के निधन के बाद जब स्थानीय लोगों ने उनके घर का सामान खंगाला, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। घर के भीतर रखे 30 से अधिक बोरों में सिक्के और छोटे नोट भरे पड़े थे, जिनकी गिनती करने पर कुल 8 लाख 40 हजार रुपये की रकम सामने आई।
उम्र संबंधी बीमारी से हुई हूर की मौत
जानकारी के अनुसार, 68 वर्षीय हूर मांड्या में एक किराए के मकान में अकेली रहती थीं। उन्होंने शादी नहीं की थी। कुछ साल पहले तक उनकी बहन उनके साथ रहती थीं, लेकिन लगभग दो साल पहले उनका भी निधन हो गया था। हूर लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही थीं, जिसके चलते हाल ही में उनका निधन हो गया।
30 बोरों में मिले रुपये, गिनती में छूटे पसीने
हसन और आसपास के इलाकों में भीख मांगकर अपना पेट भरने वाली हूर के निधन के बाद जब पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार और घर की साफ-सफाई के लिए कमरे की तलाशी ली, तो वहां 30 से भी ज्यादा बोरे रखे मिले।
संदेह होने पर जब बोरों को खोला गया तो लोग दंग रह गए। बोरों के अंदर 10, 20 और 50 रुपये के नोटों के बंडल और भारी मात्रा में सिक्के ठसाठस भरे हुए थे। पैसों का ढेर इतना बड़ा था कि स्थानीय लोगों को उसे गिनने में घंटों की मशक्कत करनी पड़ी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में ग्रामीण घर के कोने-कोने से बोरियां निकालकर नोट और सिक्के गिनते नजर आ रहे हैं।
कर्नाटक के मडिया में एक बुज़ुर्ग महिला की जिंदगी की कहानी ने सबको हैरान कर दिया।
बताया जाता है कि वह मस्जिद के पास भीख मांगकर पैसे जमा करती थीं। उनके निधन के बाद जब मस्जिद कमेटी के लोग घर की सफाई करने पहुंचे, तो अंदर जगह-जगह पैसों से भरे बैग मिले।
बताया जा रहा है कि रकम ₹1… pic.twitter.com/urtxWkGGhi
— Nightmare of Haters 😎 (@imTrueIndia1) August 23, 2026
भाइयों में बांटी गई रकम
गिनती पूरी होने के बाद कुल 8.40 लाख रुपये की राशि दर्ज की गई। हूर के निधन के बाद कानूनी और सामाजिक प्रक्रिया के तहत यह पूरी रकम उनके भाइयों को सौंप दी गई।
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कुल रकम में से एक भाई को 6 लाख रुपये दिए गए, जबकि दूसरे भाई के हिस्से में 2 लाख 40 हजार रुपये आए। अपनी बहन की इस अनूठी बचत को देखकर भावुक हुए दूसरे भाई ने अपने हिस्से की पूरी 2.40 लाख रुपये की रकम स्थानीय मस्जिद को दान करने का फैसला किया।
जीवनभर जोड़ी पाई-पाई, पर नहीं आ सकी खुद के काम
हूर का यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर और छोटी-छोटी रकम बचाकर 8.40 लाख रुपये का बड़ा फंड तो खड़ा कर लिया, लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिस पैसे को उन्होंने अपनी पाई-पाई की बचत से इकट्ठा किया था, उसका इस्तेमाल वे अपनी जिंदगी में नहीं कर सकीं।
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