युवाओं के सपनों को मिले सुरक्षा कवच, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बने एक अभेद्य तंत्र: कामिनी शर्मा

NEET UG Paper Leak Protest

Lucknow News: किसी भी समर्थ और सशक्त देश की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था पर टिकी होती है, और उस नींव को मजबूत करने वाले सबसे बड़े स्तंभ हमारे युवा हैं। पिछले कुछ समय से देश भर में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जिस तरह के विवाद और शंकाएं सामने आई हैं, वे पूरे समाज और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गहरे आत्ममंथन का विषय हैं। जब एक अभ्यर्थी किसी परीक्षा की तैयारी में जुटता है, तो वह महज किताबों के पन्ने नहीं पलटता, बल्कि अपने, अपने परिवार और देश के उज्ज्वल भविष्य के ताने-बाने बुनता है। ऐसे में उन मासूम सपनों की रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है।

सालों की कठिन तपस्या और गहरा आघात

हमारे देश के होनहार छात्र अपनी परीक्षाओं में सफल होने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। अपनी नींद, खान-पान, त्योहार और निजी खुशियों को त्यागकर वे सिर्फ लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनके साथ-साथ उनके माता-पिता भी एक लंबी कठिन तपस्या से गुजरते हैं। ऐसे में जब किसी परीक्षा का पर्चा लीक होने या धांधली की खबर आती है, तो वह केवल एक प्रश्न-पत्र का लीक होना नहीं होता, यह लाखों युवाओं के भरोसे, उनकी कड़ी मेहनत और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार होता है। इस तरह की परिस्थितियां युवाओं को गहरे अवसाद और हताशा की तरफ धकेल देती हैं।

तकनीक के उपयोग से बने अभेद्य सुरक्षा चक्र

मौजूदा सरकार हमेशा से युवाओं के विकास और कल्याण के प्रति गंभीर रही है। युवाओं की ऊर्जा का राष्ट्र निर्माण में सही इस्तेमाल हो, इसके लिए निरंतर कदम उठाए गए हैं। लेकिन अब वक्त आ गया है कि देश में एक ऐसा अभेद्य परीक्षा ढांचा (Foolproof Examination System) स्थापित किया जाए, जिसमें सेंध लगाना किसी भी शिक्षा माफिया या असामाजिक तत्व के लिए पूरी तरह नामुमकिन हो।

यह सख्त और पारदर्शी ढांचा केवल नीट (NEET) या यूपीएससी जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं तक सीमित न रहे, बल्कि राज्यों की हर छोटी-बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षा पर भी समान रूप से लागू हो। परीक्षा केंद्र के निर्धारण, पेपर प्रिंटिंग, सीलबंद परिवहन से लेकर डिजिटल सुरक्षा तक हर चरण में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति लागू होनी चाहिए। मानवीय दखल को न्यूनतम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन (Block-chain) जैसी आधुनिक तकनीकों का भरपूर सहारा लिया जाना चाहिए।

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डर-मुक्त माहौल ही बनाएगा श्रेष्ठ भारत

हमारा मूल उद्देश्य छात्रों के मन से परीक्षा व्यवस्था को लेकर बने डर को जड़ से खत्म करना होना चाहिए। किसी भी विद्यार्थी का पूरा ध्यान केवल अपनी पढ़ाई और योग्यता को निखारने पर केंद्रित होना चाहिए, न कि इस चिंता पर कि उसकी साल भर की मेहनत किसी की बेईमानी की वजह से बेकार हो जाएगी।

सरकार से यह एक सकारात्मक और रचनात्मक आग्रह है कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए जल्द से जल्द एक ऐसा ऐतिहासिक और अभेद्य सुरक्षा मॉडल घोषित किया जाए, जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बने। जब हमारे बच्चे बिना किसी भय और मानसिक दबाव के अपनी प्रतिभा दिखाएंगे, तभी एक आत्मनिर्भर और श्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा।

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