सोनम वांगचुक के आंदोलन के बीच सुर्खियों में आईं उनकी पत्नी गीतांजलि, दिलचस्प है कॉर्पोरेट जॉब छोड़ लद्दाख बदलने वाली कहानी
नई दिल्ली: लद्दाख के अधिकारों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर पूरे देश में चिंता बढ़ती जा रही है। तमाम सेलिब्रिटीज और सामाजिक संगठन उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े हैं। इस संघर्ष के बीच, बहुत कम लोग जानते हैं कि सोनम वांगचुक के इस सफर में उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो उनकी सबसे बड़ी ढाल और ताकत बनकर खड़ी हैं।
कौन हैं गीतांजलि जे. आंग्मो
गीतांजलि जे. आंग्मो सिर्फ सोनम वांगचुक की जीवनसंगिनी ही नहीं, बल्कि खुद में एक बेहद सशक्त और प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। वह लद्दाख स्थित प्रसिद्ध हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की सह-संस्थापक और सीईओ हैं। मूल रूप से ओडिशा के बालासोर के एक पंजाबी जैन परिवार में जन्मीं गीतांजलि की शुरुआती पढ़ाई वहीं हुई। उन्होंने फकीर मोहन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, भुवनेश्वर (XIMB) से एमबीए की डिग्री हासिल की। शानदार कॉर्पोरेट करियर छोड़कर वे समाज में बदलाव लाने के उद्देश्य से लद्दाख आईं, जहाँ उनकी मुलाकात सोनम वांगचुक से हुई।

कराटे ब्लैक बेल्ट और रशियन बैले डांसर
गीतांजलि की बहुमुखी प्रतिभा किसी को भी हैरान कर सकती है। उन्होंने डेनमार्क में करीब 15 सालों तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कंपनियों में काम किया, जहाँ उन्होंने कॉर्पोरेट लीडरशिप और सोशल इनोवेशन का गहरा अनुभव लिया। वह सिर्फ एक कुशल प्रशासक ही नहीं हैं, बल्कि मार्शल आर्ट्स (कराटे) में ब्लैक बेल्ट भी हैं। इसके अलावा, वह एक बेहतरीन रूसी बैले डांसर भी रह चुकी हैं। अध्यात्म में गहरी रुचि रखने वाली गीतांजलि श्री अरबिंदो के विचारों के प्रभाव में वेदांत और भगवद गीता की शिक्षा भी देती हैं।
अपनी बौद्धिक और सामाजिक सक्रियता के कारण गीतांजलि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वह प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शेवनिंग फेलो (Chevening Fellow) भी रह चुकी हैं। समाज सेवा, शिक्षा और लद्दाख के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उनके अभूतपूर्व प्रयासों के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2022 में प्रतिष्ठित ‘वुमन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया था।

लद्दाख के हजारों बच्चों को समर्पित कर दी जिंदगी
सोनम वांगचुक और गीतांजलि के दांपत्य जीवन का एक पहलू बेहद भावुक और प्रेरणा देने वाला है। दोनों का अपना खुद का कोई बच्चा नहीं है। एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा करते हुए सोनम ने बताया था कि उन्होंने और गीतांजलि ने आपसी सहमति से निःसंतान रहने का फैसला किया, ताकि वे अपना पूरा जीवन और ऊर्जा लद्दाख के उन हजारों बच्चों के लिए समर्पित कर सकें जिनकी शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए यह जोड़ी दिन-रात काम कर रही है।
