राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों से हिली अयोध्या, जानें क्या है सच

Ayodhya donation scam

Ram Mandir controversy: भारतीय इतिहास का सबसे पुराना और विवादित मुद्दा राम जन्मभूमि आज फिर चर्चा में है। दशकों तक कानूनी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और फिर भव्य मंदिर निर्माण के बाद जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को मंजिल मिली, वहीं अब इसी मंदिर के दान-चढ़ावे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि रामलला के दरबार में पहुंचने वाले पैसे के हिसाब-किताब में लाखों-करोड़ों की ‘धांधली’ हुई है। मामला इतना गरमाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक को हस्तक्षेप करना पड़ा। आइए, समझते हैं पूरा प्रकरण– क्या है आरोप, क्या है ट्रस्ट का पक्ष, और कहां फंसी है राजनीति?

आरोपों की शुरुआत कैसे हुई

पूरा मामला 7 जून को तब उठा, जब समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7 करोड़ रुपये की ‘चोरी’ हुई है। इसके अगले ही दिन अखिलेश यादव ने सरकार और ट्रस्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि मौन रहना ही अपराध स्वीकार करने जैसा है। 9 जून को भाजपा के अपने प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग कर दी। इसके बाद तो यह मामला राजनीतिक बवाल में बदल गया।

ट्रस्ट के पूर्व अकाउंटेंट ने क्या कहा

सबसे चौंकाने वाला बयान मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह का आया। उनका आरोप है कि मंदिर में आने वाले सोने-चांदी के जेवरों और बर्तनों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता था। उनके मुताबिक, यह सब कहां जाता है, यह सिर्फ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके करीबी टिन्नू (रामशंकर यादव) को पता होता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने शीर्ष प्रबंधन से शिकायत की, तो उन्हें ही पद से हटा दिया गया।

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पीएमओ ने लिया संज्ञान, शंकराचार्य ने भी कसा तंज

मामला बढ़ने पर 10 जून को पीएमओ ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी। वहीं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चंपत राय के नाम पर ही प्रहार करते हुए कहा, चंपत का मतलब ही होता है, सब लेकर भाग जाना। हालांकि, ट्रस्ट ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

राम मंदिर में कितना आता है दान

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट को कुल 327 करोड़ रुपये मिले, जिसमें 153 करोड़ सिर्फ श्रद्धालुओं के दान से आए। मंदिर में रोजाना औसतन 42 लाख रुपये का चढ़ावा होता है। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन अकेले 3.17 करोड़ रुपये दान में मिले थे। दान पेटियों में मिली नकदी की गिनती स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की निगरानी में, सीसीटीवी कैमरों के सामने होती है। फिर भी, पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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