प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की सफल यात्रा

PM Modi UAE Netherlands Sweden Norway Italy Visit
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों संयुक्त अरब अमीरात (यूएई ) नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और इटली की छह दिवसीय यात्रा संपन्न हो चुकी है। पश्चिमी एशिया संकट सहित दुनियाभर में चल रही उथल-पुथल तथा चीन की विस्तारवादी नीतियों के दृष्टिगत प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इन देशों से द्विपक्षीय संबंध सुधारने की दिशा में एक अहम पड़ाव बनी। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान उन्हें स्वीडन तथा नार्वे जैसे देशों ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर सम्मानित किया। नार्वे की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नार्डिक देशों के शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्रा के दौरान कुल 57 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के व्यापक कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक निहितार्थ हैं। इन यात्राओं का एक परोक्ष संदेश यह भी है अब भारत दुनिया के ताकतवर देशों की कूटनीति की छत्रछाया से बाहर निकल कर अपनी स्वतंत्र नीति पर चल रहा है।

यूएई की यात्रा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की यात्रा के प्रथम चरण में यूएई पहुंचे। यहाँ भारत और यूएई के मध्य सात समझौते हुए। इन समझौतों के अंतर्गत भारत व यूएई में संयुक्त तौर पर पेट्रो उत्पादों के रणनीतिक भंडार बनाए जाएंगे। यूएई भारत में दीर्घकालिक तौर पर एलपीजी आपूर्ति करेगा, पांच अरब डॉलर का नया निवेश करके भारत में सुपर कंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करेगा। एक समझौता गुजरात के वाडीनार में शिप रिपेयरिंग क्लस्टर बनाने को लेकर भी है। इससे लाखों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। दोनों देशों की कंपनियां मिलकर बहुत शक्तिशाली कंप्यूटर प्रणाली स्थापित करेंगी जो एआई ट्रेनिंग, रिसर्च और बड़े-बड़े मॉडल चालने के लिए प्रयोग की जाएगी। दोनों देशों के बीच रक्षा, औद्योगिक सहयोग, नवाचार उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास शिक्षा एवं सैन्य डॉक्ट्रिन, विशेष अभियान, अंतर -संचालन क्षमता, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सुरक्षित संचार और सूचना आदान-प्रदान के लिए एक व्यापक रणनीतिक ढांचा स्थपित करने की सहमति बनी है।

नीदरलैंड: अपनी यात्रा के अगले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड पहुंचे जहां उनका भव्य व गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। भारत और नीदरलैंड के मध्य 17 द्विपक्षीय समझौतों से एक नया रिकॉर्ड बना। भारत और नीदरलैंड व्यापार और निवेश रक्षा और सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साथ मिलकर काम करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जे टेन के मध्य हूई वार्ता के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौते हुए। हरित हाइड्रोजन के विकास पर सहमति के साथ दोनों देश संयुक्त रक्षा उपकरण प्रणाली घटकों और अन्य प्रमुख क्षमताओं के संयुक्त निर्माण के लिए रक्षा औद्योगिक रोडमैप स्थापित करने की संभावनाओं का भी पता लगाएंगे। इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों की स्थापना शामिल है।

संयुक्त बयान के अनुसार दोनों पक्षों ने विज्ञान और नवाचार, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, समुद्री विकास और जन संबंधों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। आव्रजन मोबिलिटी पर भी समझौता हुआ। इसके अंतर्गत कुशल भारतीय पेशवेरों के लिए नीदरलैंड में काम करने की प्रक्रियाओं को आसान व निष्पक्ष बनाया जाएगा। अवैध प्रवासन रोकने के लिए भी सहमति बनी है। नीदरलैंड के पास पानी के प्रबंधन की बेहतरीन तकनीक है जिसमें भारत के साथ सहयेाग मजबूत होगा। समझौतों से अर्धचालक, अहम खनिज ,स्वास्थ्य, जल, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि व संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। इस दौरे की एक बड़ी बात यह रही कि नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटेन ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगात आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अटूट समर्थन का भरोसा दिया।

स्वीडन: प्रधानमंत्री नरेंद मोदी अपनी यात्रा के तीसरे चरण में स्वीडन पहुंचे जहां एयरपोर्ट पर स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। स्वीडन ने प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च सम्मान “रॉयल ऑर्डरऑफ़ पोलर स्टार” से सम्मानित किया। यह प्रधानमंत्री मोदी का 31वां सम्मान है। भारत -स्वीडन संबंधों में प्रधानमंत्री मोदी के असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए उन्हें इस सम्मान से सम्मानित किया गया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और पारस्परिक व्यापार को बढ़ाने सहित व्यापक अवसरों और निवेश को बढा़वा देने पर चर्चा की।

नार्वे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नार्वे यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 वर्षों के अंतराल के बाद की जाने वाली नार्वे यात्रा थी। प्रधानमंत्री मोदी ने नार्वे के शहर ओस्लो में भारत-नार्डिक शिखर सम्मलेन में भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी को नार्वे का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “ग्रैंड क्रास ऑफ़ द रॉयल नार्वेजियन आर्डर ऑफ़ मेरिट” से सम्मनित किया गया। यह प्रधानमंत्री मोदी को मिला 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। भारत और नार्वे के बीच ग्रीन एनर्जी और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप समझौते पर सहमति बनी। नार्वे के साथ स्वास्थ्य और डिजिटल तकनीक क्षेत्र में भी समझौते हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक संघर्ष के बीच भारत और यूरोप के रिश्ते नए स्वर्णिम समय में प्रवेश कर रहे हैं।

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इटली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पांचवां और अंतिम पड़ाव इटली रहा, जहां भारत और इटली ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी पर बल दिया। दोनों नेताओं ने भारत- इटली साझेदारी के संपूर्ण आयामों पर विस्तृत चर्चा की और आपसी संबंधों को दिशा देने के लिए वर्ष 2025-29 की कार्य योजना की समीक्षा की। दोनों नेताओं के मध्य भारत-ईयू के मध्य मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा हुई। इटली की पीएम मेलोनी ने इंडिया- मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनामिक कारिडेार जैसी बड़ी वैश्विक पहल पर सहयोग बढ़ाने पर बल दिया है। 2027 में “भारत-इटली ईयर ऑफ़ कल्चर एंड टूरिज्म” मनाने की योजना पर भी चर्चा की गयी।

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आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-इटली ने आपसी सहयेाग और प्रगाढ़ करने का निर्णय किया है। इटली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी एएफओ के मुख्यालय में आयोजित समारोह में एएफओ का एग्रिकोला मेडल प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में भारत के योगदान के लिए प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री की इटली यात्रा के दौरान भारत की मेलोडी टॉफी चर्चा में रही, क्योंकि यह स्वदेशी उत्पाद प्रधानमंत्री ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को उपहार में दिया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्राएं कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण थीं, इनमें सामरिक, कूटनीतिक तथा रणनीतिक संदेश छिपे हुए थे। इस यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी नए अवसरों व सप्लाई चेन के नए मार्गों की खोज करने गए थे। यदि यूएई के रास्ते यूरोप के देशों तक नया कॉरिडोर बन जाता है तो इससे भविष्य में व्यापार बहुत आसान हो जायेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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