लखनऊ में लगे अखिलेश को कटियाबाज बताने वाले होर्डिंग्स, भड़के सपाई

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी तापमान पहले से ही चढ़ने लगा है। राजधानी लखनऊ के बंगला बाजार और पुरानी जेल रोड इलाके में अचानक बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है, जिससे नया राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है।

पोस्टरों में लिखे तंज भरे नारे

इन होर्डिंग्स पर अखिलेश यादव की फोटो के साथ बड़े-बड़े अक्षरों में कटियाबाज शब्द लिखा है, जिसे उनके लिए एक अपमानजनक संज्ञा के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। पोस्टरों में यह भी आरोप लगाया गया है कि सपा सत्ता में थी तो बिजली सप्लाई में तुष्टिकरण की राजनीति की जाती थी। ‘रमजान में बिजली फुल, दिवाली पर बिजली गुल’ जैसे पुराने और विवादित नारों को भी इन होर्डिंग्स में दोहराया गया है, जो सपा शासनकाल पर करारा प्रहार करते दिख रहे हैं।

up poster war akhilesh yadav katiyabaz

बिजली चोर बताकर किया गया टैग

पोस्टरों में सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि सपा के पुराने नेता आजम खान और शफीकुर रहमान बर्क को भी निशाने पर लिया गया है। दोनों को बिजली चोर बताते हुए उन पर बिजली चोरी के पुराने मामलों से जुड़े आरोप दोहराए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पूरे होर्डिंग्स को मीडिया रिपोर्ट्स की डिजाइन यानी हेडलाइन स्टाइल में तैयार किया गया है, जिससे यह भ्रम पैदा हो रहा है कि ये किसी अखबार या न्यूज चैनल की सुर्खियाँ हैं। इस वजह से सोशल मीडिया पर ये पोस्टर वायरल हो गए हैं।

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शौकत अली का वीडियो आया सामने

इन पोस्टरों का असर तुरंत दिखने लगा। समाजवादी पार्टी के नेता शौकत अली का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह अपने समर्थकों के साथ इन होर्डिंग्स को फाड़ते नजर आ रहे हैं। शौकत अली ने साफ कहा कि वह अपने नेता अखिलेश यादव के सम्मान के खिलाफ किसी भी तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर ये पोस्टर लगवाए किसने हैं। किसी भी राजनीतिक दल या संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

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समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी नेताओं में फिलहाल हलचल तो है, लेकिन औपचारिक बयानबाजी से बचा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर जोरदार चर्चा है और चुनावी पोस्टर वॉर के लिहाज से इसे बहुत अहम माना जा रहा है। इससे पहले भी लखनऊ समेत कई शहरों में चुनावी सीजन के दौरान अखिलेश यादव के समर्थन या विरोध में पोस्टर लगते रहे हैं, लेकिन इस बार बिजली सप्लाई और तुष्टिकरण के मुद्दे को उछालकर सियासी पारा एक बार फिर गर्म हो गया है।

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