Poem: नजारा
गुण्डे घूम रहे हैं निर्भय सड़कों में, बाजारों में,
डाकू घुसकर टहल रहे हैं संसद के गलियारों में।
वोट मांगने जब आए थे, कहते थे- हम सेवक हैं,
किन्तु उन्हीं की गिनती अब तो होती है खूंखारों में।
आजादी के बाद देश का कर्णधार जिनको समझा,
पोल खुली तो पता लगा, वो हैं शामिल गद्दारों में।
सत्ता नेहरू को देकर अंग्रेजों ने वो चाल चली,
गांधीवादी लोग गिने जाने लग गए गंवारों में।
हमने नेता बनते ही सबसे पहला यह काम किया,
बेच दिया अपना चरित्र, अपना जमीर बाजारों में।
सहते रहे जुल्म वो, लेकिन अपना धर्म नहीं छोड़ा,
असली हिन्दू के दर्शन होते हैं दलित-चमारों में।
सूची में हैं केवल चोर, लुटेरे, गुण्डे, हत्यारे,
मजबूरी है ‘श्याम’, वोट बस देना है इन चारों में।
– श्याम कुमार
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