केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, शराब घोटाला केस से जज हटाने की मांग ठुकराई
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में जज बदलने की अरविंद केजरीवाल की मांग ठुकरा दी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने मामले में सुनवाई कर रहीं जज स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मामले को किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने की मांग की थी।
चीफ जस्टिस ने क्या कहा
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि याचिका वर्तमान रोस्टर के अनुसार न्यायमूर्ति शर्मा को सौंपी गई है और प्रशासनिक पक्ष पर आदेश पारित करके इसे स्थानांतरित करने का कोई कारण नहीं पाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करना चाहें तो यह निर्णय उन्हें लेना है।
केजरीवाल ने क्या मांग की थी
दरअसल, 11 मार्च को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि यदि मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के पास ही रहा तो सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से नहीं हो पाएगी। उन्होंने 9 मार्च के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस गंभीर त्रुटि के आधार पर बिना दूसरे पक्ष की सुनवाई के अंतरिम आदेश दिया गया।
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क्या है पूरा मामला
27 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में चल रही है।
9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने मामले में नोटिस जारी किया था और ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया था। साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश भी दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले से केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। अब शराब घोटाला मामले में आगे की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में ही जारी रहेगी।
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