हरियाणा के पलवल में दूषित पानी से 15 दिन में 12 लोगों की मौत, मरने वालों में 5 मासूम भी शामिल

palwal dusht pani

Newschuski Digital Desk: मध्य प्रदेश के इंदौर में जहरीले पानी से हुई 16 मौतों का दर्द देश अभी भुला भी नहीं पाया था कि हरियाणा के पलवल जिले से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां छांयसा गांव में पिछले 15 दिनों में रहस्यमयी तरीके से 12 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 5 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। गांव में हर तरफ मातम है और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में इस त्रासदी के पीछे दूषित पेयजल और हेपेटाइटिस (काला पीलिया) के संक्रमण को मुख्य वजह माना जा रहा है। करीब 5700 की आबादी वाले इस गांव में अचानक शुरू हुई इस बीमारी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मरने वालों में 8 साल से लेकर 75 साल तक के लोग शामिल हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, मरने वालों में हुफैज (11), सारिका (14), हुमा (16), दिलशाद (20), शमसुद्दीन (42), जमीला (67) और पायल (8) जैसे नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मौत का आंकड़ा आधिकारिक संख्या से कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि कई लोग अभी भी निजी अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

पानी के नमूनों में मिला कोलीफॉर्म बैक्टीरिया

पलवल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्येंद्र वशिष्ठ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में डेरा डाले हुए है। अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। गांव में दूषित पानी से लिए गए 107 पानी के नमूनों में से 23 फेल पाए गए हैं। इनमें खतरनाक ‘कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ की पुष्टि हुई है।

जांच में पाया गया कि घरों में सप्लाई होने वाले पानी और स्टोरेज टैंकों में क्लोरीन की मात्रा न के बराबर थी, जो कीटाणुओं को मारने के लिए अनिवार्य है। गांव के लोग सरकारी जलापूर्ति, भूमिगत टैंकों और टैंकरों के पानी पर निर्भर हैं। अधिकारियों का कहना है कि भूमिगत टैंकों की अनियमित सफाई और कीटाणुनाशन की कमी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

1500 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, 210 सैंपलों की जांच

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रैपिड रिस्पांस टीम को मैदान में उतारा है। गांव में अस्थाई मेडिकल कैंप और स्क्रीनिंग सेंटर बनाए गए हैं। अब तक 1500 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। लगभग 800 ओपीडी परामर्श किए गए हैं।

210 लोगों के खून के नमूनों की जांच में हेपेटाइटिस बी के दो और हेपेटाइटिस सी के नौ मामले सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि हेपेटाइटिस ए और ई के सभी नमूने निगेटिव पाए गए हैं। स्क्रब टायफस की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। फिलहाल तीन मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

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पानी को साफ करने के लिए गांव में 15,000 हैलोजन (क्लोरीन) गोलियां बांटी गई हैं। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे केवल उबालकर या आरओ का पानी ही पिएं। प्रशासन टैंकरों के जरिए बाहरी इलाकों से साफ पानी मंगवा रहा है। स्थिति को देखते हुए आसपास के इलाकों से आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) से शुद्ध पानी मंगवाया गया है।

सिस्टम की लापरवाही पर फिर उठे सवाल

छांयसा गांव की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में भी जहरीले पानी से 16 लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं ने देशभर में पेयजल की गुणवत्ता और जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सख्त कदम न उठाए गए तो जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। फिलहाल छांयसा गांव में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट पर हैं और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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