अयोध्या में मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह मस्जिद का निर्माण अब भी अधर में, फंड की किल्लत से रुका काम
अयोध्या: राम नगरी अयोध्या में विकास की गति के बीच एक विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण के बाद आगामी 30 अप्रैल तक सभी निर्माण कार्य पूरे करने की डेडलाइन तय हो गई है, वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली 5 एकड़ जमीन पर बनने वाली मस्जिद का काम अब भी फंड की किल्लत से जूझ रहा है।
मस्जिद के लिए क्यों नहीं जुट पा रहा है पैसा
इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी ने बताया कि मस्जिद का नक्शा पास कराने और शुरुआती काम के लिए करीब 15 करोड़ रुपये की जरूरत है। लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि ट्रस्ट के खाते में अब तक एक करोड़ रुपये भी जमा नहीं हो पाए हैं।
देरी की कुछ मुख्य वजहें
विदेशी चंदे पर रोक: मस्जिद ट्रस्ट का अभी तक FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) में रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इसके बिना विदेश में रहने वाले दानदाताओं से मदद नहीं ली जा सकती।
कोई जन-अभियान नहीं: ट्रस्ट ने साफ किया है कि वे राम मंदिर की तरह घर-घर जाकर चंदा मांगने का कोई अभियान नहीं चलाएंगे। उनकी नजर केवल धनी लोगों और कॉर्पोरेट जगत के सहयोग पर है।
विकास प्राधिकरण की फीस: नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही लाखों रुपये खर्च होने हैं, जिसके लिए फिलहाल फंड उपलब्ध नहीं है।
इसे भी पढ़ें: UP Budget 2026-27: 9.12 लाख करोड़ में युवाओं को 10 लाख नौकरियां और बिना ब्याज लोन
नया नाम और बदला हुआ डिजाइन
मस्जिद के स्वरूप को लेकर ट्रस्ट ने कई बदलाव किए हैं। पहले इसे ‘धन्नीपुर मस्जिद’ कहा जा रहा था, लेकिन अब इसका नाम बदलकर ‘मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह मस्जिद’ कर दिया गया है।
अवधी कल्चर की झलक: मस्जिद का पुराना मॉडर्न डिजाइन बदल दिया गया है। अब नया नक्शा पारंपरिक ‘अवधी संस्कृति’ को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।
रमजान के बाद उम्मीद: जुफर फारुकी को उम्मीद है कि रमजान के बाद अप्रैल में वे मस्जिद का नया नक्शा अयोध्या विकास प्राधिकरण में जमा कर देंगे।
मस्जिद के साथ और क्या बनेगा
ट्रस्ट की योजना केवल मस्जिद बनाने तक सीमित नहीं है। योजना के अनुसार, मस्जिद परिसर में एक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कम्युनिटी किचन (लंगर), बड़ी लाइब्रेरी और एक संग्रहालय भी बनाया जाएगा। हालांकि, चेयरमैन ने साफ किया कि सबसे पहले मस्जिद का निर्माण पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
इसे भी पढ़ें: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से तनाव में आ गए चीन
