हाईकोर्ट ने UP के गुमशुदा मामले को गंभीरता से लिया, सरकार को किया तलब
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में लापता हुए लोगों की बढ़ती संख्या ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की चिंता बढ़ा दी है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुरुवार को एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आने पर स्वयं ही संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दर्ज की और सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
अदालत को एक गुमशुदा व्यक्ति के मामले की सुनवाई के दौरान पता चला कि पिछले दो सालों में यूपी में 1,08,300 (एक लाख आठ हज़ार तीन सौ) लोग लापता हुए हैं, जिनकी गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज हुई है। लेकिन इनमें से पुलिस मात्र 9,700 लोगों का ही पता लगा पाई है। यानी 98,600 से ज्यादा लोग अभी भी गायब हैं।
इस भयावह आंकड़े को देखते हुए न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने इसे गंभीर स्थिति और चिंता का विषय बताया और स्वतः ही एक जनहित याचिका दर्ज कर ली। अदालत ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
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सभी आंकड़े पेश करें: संबंधित विभागों को प्रदेश के सभी गुमशुदा व्यक्तियों का पूरा रिकॉर्ड और आंकड़े अदालत के सामने रखने होंगे।
ऊंचे अधिकारी हाजिर हों: अगली सुनवाई (23 मार्च) में अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित रहना होगा।
कार्ययोजना मांगी: अदालत ने गुमशुदा मामलों से निपटने की एक विस्तृत रिपोर्ट और ठोस कार्ययोजना भी मांगी है।
न्यायालय ने माना कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का गायब होना कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है। आंकड़ों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी, ताकि गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश और जांच की प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सके।
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