स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने सौंपे हस्ताक्षर
नई दिल्ली: केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच चल रही तकरार अब लोकसभा स्पीकर के पद तक पहुंच गई है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का औपचारिक नोटिस थमा दिया है। लोकसभा महासचिव को सौंपे गए इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसने दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
विपक्ष का यह कदम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान हुए विवाद का नतीजा है। विपक्षी दलों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि सत्तापक्ष को खुली छूट दी जा रही है, जबकि विपक्षी नेताओं की आवाज दबाई जा रही है। विपक्ष ने सदन के भीतर महिला सांसदों के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी गहरी नाराजगी जताई है।
इस कदम पर पलटवार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस प्रस्ताव से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जरूरी आंकड़ा नहीं है। रिजिजू ने उल्टा विपक्ष पर ही स्पीकर की गरिमा को ठेस पहुँचाने और सदन में अनुशासनहीनता दिखाने का आरोप मढ़ा।
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चौथी बार दोहराया जा रहा है इतिहास
भारतीय संसदीय इतिहास में यह केवल चौथा मौका है जब लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है।
1954: जीवी मावलंकर (खारिज हुआ)
1966: हुकम सिंह (पर्याप्त समर्थन नहीं मिला)
1987: बलराम जाखड़ (अस्वीकार हुआ)
क्या है नियम
संविधान के अनुच्छेद 94 के मुताबिक, स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है। इसके बाद, यदि सदन के सदस्यों का बहुमत प्रस्ताव के पक्ष में वोट करता है, तभी स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है। फिलहाल, संख्या बल को देखते हुए इस प्रस्ताव का पास होना नामुमकिन लग रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसके जरिए अपना विरोध दर्ज करा दिया है।
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