योगी की दोबारा सत्ता में वापसी से सधेंगे कई समीकरण, यूपी की राजनीति में आएगा बड़ा परिवर्तन

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CM Yogi & Akhilesh Yadav

राघवेंद्र प्रसाद मिश्र

लखनऊ: वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद देश में जितने चुनाव हो रहे हैं, वह चुनाव कम मोदी हराओ प्रतियोगिता ज्याद नजर आ रही है। हर छोटे-बड़े राजनीतिक दल आपसी दुश्मनी को भूलकर एक मंच पर आकर भाजपा के विजय रथ को रोकने की कोशिश कर चुके हैं। बावजूद इसके भाजपा सरकार सबका साथ और सबका विकास के ध्येय के साथ आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Election 2022) में प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Sarkar) को दोबारा सत्ता में वापसी करने से रोकने के लिए सपा ने पूरा जोर लगा दिया है। अखिलेश यादव हर छोटे-बड़े दलों से हाथ मिलाने के साथ ही रूठे चाचा शिवपाल को भी मना लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर भी है। वहीं यह चुनाव भाजपा के साथ-साथ अन्य राजनीतिक पार्टियों की भविष्य तय करने वाला साबित होगा। योगी सरकार अगर दोबारा सत्ता में वापसी करती है, तो निश्चित तौर पर योगी आदित्यनाथ का कद और बढ़ जाएगा।

यूपी विधानसभा चुनाव भाजपा इस बार योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक अपनी वर्चुअल रैली के दौरान योगी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते सुने जा रहे हैं। भाजपा के चुनाव प्रचार में भी पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज और योगी सरकार के कामकाज की तुलना की जा रही है। भाजपा यह बताने की कोशिश कर रही है कि पहले की सरकारों में गुंडों-माफियाओं का किस तरह से राज्य में वर्चस्व था और योगी राज में ऐसे अपराधियों का क्या हश्र हुआ?

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वहीं सपा के लिए यह चुनाव करो या मरो की स्थिति वाली है। क्योंकि सत्ता विरोधी लहर पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के साथ है। यही वजह है की नई सपा का नारा देने वाली पार्टी चुनाव के दौरान अपने पुराने अंदाज में दिखने लगी है। समाजवादी पार्टी की तरफ से जारी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में गुंडों-माफियाओं की झलक साफ नजर आ रही है। पार्टी ने जेल में बंद आजम खान और नाहिद हसन तक को प्रत्याशी घोषित करके यह साबित कर दिया है कि वह सत्ता में आने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उधर भाजपा अगर जीतती है तो छोटे दलों के वर्चस्व हाशिए पर आ जाएंगे। क्योंकि इस बार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा को हराने के लिए लगभग सभी छोटे दलों को अपने साथ ले लिया है। और जो दल साथ आने से रह गए हैं, वह भी भाजपा हराओ प्रतियोगिता के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने की ताल ठोक रहे हैं।

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