प्रदर्शनकारियों का लाल किले पर उत्पात

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लखनऊ। गणतंत्र दिवस परेड के बीच देश की राजधानी दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुयी। दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानून के खिलाफ दो महीने से आंदोलन कर रहे किसानों ने आज ट्रैक्टर रैली निकाली। ट्रैक्टर रैली के दौरान कई जगह किसान आंदोलन बेकाबू हो गया। किसानों ने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ दिल्ली में घुसकर लाल किले पर अपना झंडा फहरा दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। भीड़ को काबू करने के दौरान कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। वहीं, प्रदर्शनकारियों की तरफ से पुलिसवालों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की गई। राजधानी में कुछ जगहों पर किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच भिड़ंत भी हुयी। इधर, दिल्ली में बिगड़ते हालात के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह ने आपात बैठक बुलाई है। मीटिंग में दिल्ली पुलिस, इंटेलिजेंस और गृह मंत्रालय के आला अधिकारी मौजूद हैं।

दिल्‍ली, नोएडा और गाजियाबाद में इंटरनेट बंद

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किसानों की ट्रैक्‍टर रैली में हिंसा को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया गया है। खबर के मुताबिक, उन सभी बॉर्डर एरियाज में जहां पर प्रदर्शन चल रहा है, रात 12 बजे तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। गृह मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, सिंघु, गाजीपुर, टीकरी, मुकरबा चौक, नांगलोई और आसपास के इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है।

पुलिस की गांधीगिरी
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नांगलोई में प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए पुलिसवाले खुद जमीन पर बैठ गए। यहां से किसानों के जत्थे नजफगढ़ की ओर तय रूट पर जाने की बजाय रोहतक रोड पर पीरागढ़ी की ओर बढ़ रहे हैं। बहादुरगढ़ से पीरागढ़ी मेट्रो सेवा तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई। पीरागढ़ी सहित इस रूट पर लगने वाले सभी स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। प्रदर्शनकारी राजधानी के मकरबा चौक पर पुलिस के वाहन पर चढ़ गए। इसके बाद उन लोगों ने पुलिस के बैरिकेड हटा दिए।

किसान नेताओं ने पल्ला झाड़ा
हिंसा और तोड़फोड़ के बीच किसान नेता अब अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने उत्पात मचाने वालों से खुद को अलग करते हुए घटना की निंद की है। संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी करते हुए कहा, ”हमारे सभी प्रयासों के बावजूद कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने रूट का उल्लंघन किया और निंदायोग्य काम किए। कुछ असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ की है, नहीं तो आंदोलन शांतिपूर्ण था। हमने हमेशा कहा है कि शांति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसके उल्लंघन से आंदोलन को नुकसान होगा। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पहले तो हिंसा की जानकारी होने से इनकार किया और फिर आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के लोग आंदोलन को खराब करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। किसान नेता योगेंद्र यादव ने भी किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

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