17 मई इतिहास का खास दिन : जब चोरी हो गयी थी चार्ली चैपलिन की लाश

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लखनऊ। इतिहास के पन्नों में 17 मई बेहद खास दिन है। इस दिन एक नहीं कई ऐतिहासिक घटनाएं घटित हुयीं थीं। चार्ली चैपलिन (हास्य कलाकार) जो किसी एक देश के नहीं बल्कि सारी दुनिया में अपने अभिनय के लिए चाहे और सराहे जाते हैं। चार्ली चैपलिन सबसे प्रसिद्ध कलाकारों में से एक होने के अलावा अमेरिकी सिनेमा के क्लासिकल हॉलीवुड युग के प्रारंभिक से मध्य तक एक महत्वपूर्ण फिल्म निर्माता, संगीतकार और संगीतज्ञ थे। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि दुनिया को हंसाने वाले चार्ली चैपलिन की मौत के बाद कुछ चोर उनकी कब्र खोदकर ताबूत निकाल ले गए। स्विट्जरलैंड के वेवे में 25 दिसम्बर 1977 को नींद में उनकी मृत्यु हो गई। वह कोर्सिअर-सुर-वेवे कब्रिस्तान, वौड़, स्विट्जरलैंड में दफनाए गए थे। 1 मार्च 1978 को, उनके परिवार से धन उगाही के प्रयास में स्विस यांत्रिकी के एक छोटे समूह द्वारा चैपलिन की लाश की चोरी की गई। साजिश विफल रही, लुटेरे पकड़े गए और ग्यारह सप्ताह बाद जिनीवा झील के पास उनकी लाश बरामद हुई। ऐसे प्रयासों को रोकने के रोकने के लिए उनकी लाश को दो मीटर के कंक्रीट के नीचे दुबारा दफनाया गया था। पुलिस ने चोरों को पकड़कर 17 मई के दिन ही चार्ली चैपलिन का ताबूत बरामद किया।

भारतीय मुक्केबाजों ने लगाया था स्वर्णिम पंच

भारतीय खेलों के इतिहास में 17 मई का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। दरअसल 2010 में 17 मई के दिन भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक जीते थे। बीजिंग ओलिंपिक के कांस्य विजेता विजेंद्र सिंह के अलावा दिनेश कुमार, परमजीत समोटा, अमनदीप, सुरंजॉय और जय भगवान ने अपने-अपने वर्ग का फाइनल जीता। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का अवार्ड विजेंद्र कुमार को मिला। वहीं क्रिकेट की बात करें तो महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 17 मई 1987 को ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था।

अन्य खास घटनाएं

आज के 1769 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के कपड़ा उद्योग को बर्बाद करने के लिए बुनकरों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। जबकि 1975 में जापानी महिला श्रीमती जुनको तैबेई माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम महिला बनी थी। 17 मई 1540 को ही शेरशाह ने हरदोई में हुमायूं को मात दी। इसे इतिहास में कन्नौज की लड़ाई के नाम से जाना जाता है। आज के लिए 1949 को भारत ने राष्ट्रमंडल देशों के समूह में बने रहने का फैसला किया। आज ही वर्ष 2007 में भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता का चौथा दौर रावलपिंडी में शुरू।

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