कलियुग का दिव्य यज्ञ: पुष्कर में हो रहा शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ, 27 करोड़ मंत्र जप का अनोखा संकल्प
जम्मू/कठुआ: सनातन वैदिक धर्म की परंपरा में समय-समय पर ऋषियों-महर्षियों द्वारा समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए दिव्य यज्ञों का आयोजन होता रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान के पवित्र तीर्थ पुष्कर में कलियुग का पहला शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। इस महायज्ञ के प्रेरणास्रोत परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज हैं।
43 दिनों तक चलेगा यह भव्य अनुष्ठान
यह ऐतिहासिक महायज्ञ 8 मार्च 2026 से शुरू होकर 19 अप्रैल 2026 को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। इस विशाल आयोजन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक शांति स्थापित करना, आतंकवाद जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का नाश करना और सनातन वैदिक धर्म की पुनः स्थापना करना है।
यह संगठित आध्यात्मिक प्रयोग है
श्रीरामलला सदन देवस्थान ट्रस्ट, अयोध्या धाम के अध्यक्ष जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक संगठित आध्यात्मिक प्रयोग है। उन्होंने कहा, यह महायज्ञ मानवता के कल्याण, मानसिक शांति और वैश्विक समरसता की स्थापना के लिए समर्पित है।

27 करोड़ मंत्र जप का संकल्प
महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज के अनुसार, इस महायज्ञ में 2000 ब्राह्मण प्रतिदिन 60 लाख गायत्री मंत्र का जप कर रहे हैं। कुल मिलाकर 27 करोड़ जप का संकल्प लिया गया है। 200 यज्ञ कुंडों में निरंतर 43 दिनों तक चलने वाला यह अनुष्ठान अपनी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा उदाहरण है। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के विद्वानों के अनुसार यह आयोजन पूरी तरह से शास्त्रसम्मत, अनुशासित और वैश्विक स्तर पर अत्यंत दुर्लभ है। यह वैदिक परंपरा के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है।
पुष्कर का चुना गया यज्ञस्थल
पुष्कर तीर्थ, जहां ब्रह्मा जी का प्राचीन मंदिर स्थित है, इस दिव्य आयोजन के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थल माना गया है। यह महायज्ञ माता सावित्री और माता गायत्री के मध्य स्थित यज्ञस्थल पर संपन्न हो रहा है, जो इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा को और भी अधिक प्रभावशाली बना रहा है।

श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट का आध्यात्मिक संदेश
इस पावन अवसर पर श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट एवं स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज ने कहा, यह महायज्ञ केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन में आध्यात्मिक जागरण, मानसिक शांति और नैतिक मूल्यों की स्थापना का दिव्य माध्यम है। जब हजारों लोग एक साथ शुद्ध भाव से मंत्र जप करते हैं, तो वह ऊर्जा सम्पूर्ण विश्व में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
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उन्होंने आगे कहा, गायत्री मंत्र का सामूहिक जप कलियुग के अंधकार को दूर करने का एक सशक्त साधन है। यह महायज्ञ मानवता को एकजुट कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करता है। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि इस प्रकार के दिव्य आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना, सदाचार और समरसता का विस्तार हो तथा प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को धर्ममय और कल्याणकारी बना सके। उन्होंने कहा, सभी भक्तों से निवेदन है कि इस पवित्र पुष्कर तीर्थ में आकर इस दिव्य महायज्ञ के दर्शन करें, यज्ञमंडप की परिक्रमा करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं। विश्व कल्याण के इस महान संकल्प में सहभागी बनें और इस आध्यात्मिक ऊर्जा का हिस्सा बनें।
रिपोर्ट: डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय
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