अस्पताल में बेड नहीं, श्मशान में बेटिंग, फिर भी कोरोना नहीं है!

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प्रदीप तिवारी

लखनऊ। कोरोना के कहर से पूरा देश कराह रहा है। इलाज पाने के लिए संक्रमित से लेकर उसके परिजन तक संघर्ष कर रहे हैं। कई ऐसे बदनसीब हैं जिनकी मौत समय से इलाज न मिल पाने की वजह से हो गई। मीडिया, सोशल मीडिया में ऐसी भयावह तस्वीरें तैर रही हैं, जिन्हें देखकर मन विचलित हो जाता है। बावजूद इसके कुछ ऐसे लोग भी मिल जाते हैं, जिन्हें यह लगता है कोरोना वायरस जैसी कोई चीज नहीं है। ऐसी सोच वालों का ही नतीजा है कि भारत जैसा देश कोरोना के खिलाफ जीती हुई जंग हारता नजर आ रहा है।

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देश में बढ़ते कोरोना संकट के बीच अधिकत्तर लोग केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने में लगे हुए हैं। उनका मानना है कि इस स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदार है। जबकि सच यह है कि इस स्थिति के लिए हम सब जिम्मेदार हैं। क्योंकि इस महामारी को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर जो कड़ाई बरती गई, उसी का नतीजा रहा कि संक्रमण को काफी हद तक रोक लिया गया था। ऐसा माना जा रहा था कि कोरोना के खिलाफ जारी जंग भारत जीत चुका है। लेकिन प्रशासनिक स्तर से ढिलवाई होते ही लोग काल की तरफ तेजी से आगे बढ़ने लगे। नतीजा आज सबके सामने है और जिस स्थिति के बारे में सोचकर रूह कांप जाए, आज देश उस दौर से गुजर रहा है।

आखिर कब खुलेगी आंख

corona se daed

देश के सभी बड़े शहर कोरोना वायरस के कहर से बर्बाद हो रहे हैं। अस्पतालों में बेड फुल चल रहे हैं। कोरोना संक्रमित की बात ही छोड़ दीजिए आम बीमारी का इलाज नहीं मिल पा रहा है। मौतों का आंकड़ा इतना बढ़ गया है कि श्मशान में शवों को दफनाने और जलाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हैरत तब होती है जब कोई यह कहता मिल जाता है कि कोरोना—वोरोना कुछ नहीं है। ऐसे में यह साफ हो जाता है कि जिस देश के नागरिकों की इतनी भयावह स्थिति पर आंख न खुले, उस देश का क्या हो सकता है।

सोशल मीडिया पर लंबी जमात

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभुत्व के बीच इस प्लेटफार्म पर हर तरह के विशेषाज्ञों की भरमार हो गई है। यह हर कोई खुद को महाज्ञानी साबित करने में लगा हुआ है। इन विशेषज्ञों द्वारा कोरोना वायरस से बचने के इतने उपाय बताए गए कि अगर वह प्रभावी होता तो आज देश में वैक्सीनेशन कराने की जरूरत ही न होती। आज जब देश अस्पताल और आक्सीजन की किल्लत से जूझ रहा है तो सोशल मीडिया विशेषज्ञ अस्पताल बनाने से लेकर आक्सीजन के उत्पादन तक पर अपने अनोखे—अनोखे विचार व्यक्त कर रहे हैं। मजे की बात यह है कि जिस सरकार की वजह से उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का प्लेटफार्म मिला है, उसी सरकार को सरकार कैसे चलाई जाती है, ज्ञान दिया जा रहा है।

वक्त है संभल जाइए

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फिलहाल देश इस समय संक्रमण के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जिससे निजात पाना इतना आसान नहीं लग रहा है। स्थिति इतनी भयानक हो गई है कि सबको इलाज संभव करा पाना भी मुश्किल है। ऐसे में जिन्हें यह लगता है कि कोरोना जैसी कोई चीज नहीं है, वह संभल जाएं। क्योंकि इस महामारी की चपेट में जो आया है उसे पछताने के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ। राहत वाली बात यह है कि भारत में इस महामारी से ठीक होने वालों की संख्या अच्छी खासी है। बावजूद इसके बिना लोगों के सहभागिता के इस महामारी से उबर नहीं जा सकता। ऐसे में यह जरूरी है कि लोग सरकारी गाइडलाइंस का पालन करते हुए अपने पैर को संभाल लें।

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