पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को लेकर संसद में विपक्ष का हंगामा

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नयी दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि को लेकर हंगामा किया जिसके कारण उच्च सदन की बैठक बाधित हुयी और चार बार के स्थगन के बाद अंतत: पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। सभापति एम वेंकैया नायडू ने शून्यकाल में कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडगे की ओर से नियम 267 के तहत कार्यस्थगन नोटिस मिला है जिसमें उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर चर्चा का अनुरोध किया है।

नियम 267 के तहत सदन का सामान्य कामकाज स्थगित कर किसी अत्यावश्यक मुद्दे पर चर्चा की जाती है। नायडू ने कहा कि उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया है क्योंकि सदस्य मौजूदा सत्र में विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान एवं अन्य मौकों पर इस संबंध में अपनी बात रख सकते हैं।

हालांकि नायडू ने नेता प्रतिपक्ष को सदन में इस मुद्दे का उल्लेख करने की अनुमति दी। खड़गे ने पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की कीमतों में खासी वृद्धि होने का जिक्र करते हुए इसे “ज्वलंत विषय” बताया तथा इस संबंध में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोग पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि को लेकर आंदोलित हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें लगभग 100 रुपये प्रति लीटर तक हो गई हैं, जबकि डीजल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गयी है। उन्होंने इसी प्रकार रसेाई गैस(एलपीजी) की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।

खडगे ने कहा कि सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और अन्य कर लगा कर 21 लाख करोड़ रुपये एकत्र किए हैं जबकि कीमतों में वृद्धि के कारण किसान और आम लोग परेशान हैं।

सभापति ने नहीं दी चर्चा की अनुमति

कांग्रेस नीत विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करता रहा। लेकिन सभापति नायडू ने इस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी और सदन में प्रश्नकाल शुरू कराया। इस दौरान विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और कुछ सदस्य आसन के समीप भी आ गए। सदन में हंगामा थमते नहीं देख सभापति ने करीब 10 बजे बैठक सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

एक बार के स्थगन के बाद 11 बजे बैठक शुरू होने पर भी विपक्ष ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर चर्चा की मांग दोहरायी। लेकिन उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सभापति ने पहले ही इस संबंध में अपनी व्यवस्था दे दी है और उस पर पुनर्विचार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सदस्यों को विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज और विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। इस पर नेता प्रतिपक्ष खडगे ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा है जिसे टाला नहीं जा सकता।

सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित

उपसभापति ने सदस्यों से शांत रहने और सदन का कामकाज चलने देने की अपील की। लेकिन इसका असर नहीं होते देख उन्होंने 11 बजकर करीब पांच मिनट पर बैठक दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर एक बजे बैठक फिर शुरू होने पर भी कार्यवाही 15-15 मिनट के लिए दो बार स्थगित की गयी।

दोपहर 01:30 बजे पीठासीन उपसभापति वंदना चव्हाण ने घोषणा की कि मंगलवार से उच्च सदन की बैठक अपने सामान्य समय के अनुसार पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होगी और शाम छह बजे तक चलेगी। उन्होंने कहा कि सभापति नायडू ने विभिन्न दलों के सदस्यों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है। वंदना चव्हाण ने इस घोषणा के बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

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