कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की ऐसे मदद करेगी मोदी सरकार, जानिए क्या है योजना

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नई दिल्ली। कोरोनावायरस (Coronavirus) ने कई लोगों से बहुत कुछ छीना है। भारत में इस महामारी के चलते अबतक करीब तीन लाख 25 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से कई बच्चे ऐसे भी हैं जिनके सिर से मां—बाप का साया छिन गया है। उन अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने कल्याणकारी योजना की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने कोविड की वजह से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए कई तरह की सुविधाओं की घोषणा की है। सरकार की तरफ से अनाथ हुए बच्चों की स्कूली पढ़ाई के खर्चे से लेकर उनको मासिक छात्रवृत्ति सहायता देने तक के लिए कई घोषणाएं की गई हैं।

स्कूली शिक्षा: 10 साल से कम उम्र वालों के लिए

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इस योजना के तहत 10 साल से कम उम्र के बच्चे को नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे स्कॉलर के रूप में प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही अगर बच्चे का दाखिला किसी निजी स्कूल में होता है तो ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ से आरटीई के नियमों के अनुसार फीस दी जाएगी। इतना ही नहीं पीएम केयर्स की तरफ से बच्चों की ड्रेस, किताबें और नोटबुक पर आने वाले खर्च का भी भुगतान करेगा।

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11-18 साल के बीच के बच्चों के लिए

11 से 18 वर्ष के बीच वालों के बच्चों के लिए ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत बच्चे को केंद्र सरकार के किसी भी आवासीय स्कूल, जैसे सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय आदि में प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही अगर बच्चा अपने दादा-दादी या किसी परिचित के साथ रहना चाहता है तो उसे नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे स्कॉलर के रूप में प्रवेश दिया जाएगा। बच्चे की फीस का भुगतान पीएम केयर्स की तरफ से किया जाएगा।

हायर एजुकेशन के लिए ब्यज मुक्त लोन

ऐसे बच्चे जो हायर एजूकेशन के लिए लोन लेंगे उन्हें ब्याज नहीं चुकाना होगा। मौजूदा शिक्षा ऋण मानदंडों के मुताबिक भारत में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और हायर एजुकेशन के लिए एजुकेशन लोन प्राप्त करने में बच्चों की मदद की जाएगी। बच्चों की तरफ से लोन लिए जाने पर इसके ब्याज का भुगतान ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के माध्यम से किया जाएगा। इतना ही नहीं इस विकल्प के रूप में ऐसे बच्चों को केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं के तहत ग्रेजुएशन की फीस के बराबर की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। ऐसे में जो बच्चे मौजूदा छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पात्र नहीं हैं, उन्हें पीएम केयर्स एक समकक्ष छात्रवृत्ति प्रदान करेगा।

हेल्थ इंश्योरेंस

इसी के साथ इस योजना में ऐसे सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत लाभार्थी के रूप में नामांकित किया जाएगा। इसमें 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कवर भी होगा। 18 वर्ष की उम्र तक के इन बच्चों के लिए प्रीमियम की राशि का भुगतान पीएम केयर्स की तरफ से किया जाएगा।

फिक्स्ड डिपोजिट

सरकार के मुताबिक 18 साल की उम्र पूरी करने वाले हर बच्चे के लिए पीएम केयर्स 10 लाख रुपए का कोष बनाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई एक योजना के जरिए योगदान देगा। 18 वर्ष की आयु से अगले पांच वर्षों तक उच्च शिक्षा हासिल करने की अवधि के दौरान उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए इस कोष का उपयोग मासिक वित्तीय सहायता/छात्रवृत्ति देने के लिए किया जाएगा। इसके सााि ही 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर, उसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए एकमुश्त के रूप से कोष से राशि दी जाएगी।

सरकार ने कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए काफी कारगर कदम उठाया है। लेकिन इस योजना का लाभी कितने बच्चों को मिल पाएगा यह बड़ा सवाल है। क्योंकि सरकारी प्रक्रिया के तहत सरकारी लाभ मिल पाना कितना संभव है यह किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में अनाथ हुए उन बच्चों का सरकारी प्रक्रिया कैसे पूरी होगी यह बड़ी समस्या है। वो भी तब जब मृतक प्रमाण पत्र बनवाने तक के लिए रिश्वत देनी पड़ती हो।

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