दूर्वा केवल चढ़ाने में ही नहीं, माइग्रेन के दर्द से राहत दिलाने में भी है कारगर

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Migraine

नई दिल्ली। पहले के समय में एक कहावत कही जाती थी, ‘जाके पैर न फटे बेवाई, वो क्या जाने पीर पराई। मतलब था कि जिसके पैर में बेवाई नहीं फटती थी वह दूसरे का दर्द नहीं समझ सकता था। समय के अनुसार बेवाई नामक यह रोग भी खात्मे की ओर बढ़ चला है। तो वहीं अब माइग्रेन नामक रोग इसकी जगह लेते हुए दिख रहा है। माइग्रेन की इससे तुलना इसलिए किया जा रहा है कि माइग्रेन का भी दर्द बेवाई के दर्द की तरह ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि बेवाई पैर के तलवे में फटती थी जबकि माइग्रेन की वजह से सर फटता है। लेकिन दोनों का दर्द बर्दाश्त करना आसान नहीं है। आज अधिकतर लोग माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे हैं।

माइग्रेन का दर्द जब भी होता है तो इतना परेशान कर देता है कि कोई भी काम करना मुश्किल हो जाता है। माइग्रेन से मरीज को तेज रोशनी या शोर शराबे से परेशानी होने लगती है। माइग्रेन का दर्द दो घंटे भी रह सकता है और दो दिन भी। माइग्रेन के दर्द में निजात पाने के लिए लोग अक्सर मेडिसिन लेते हैं। लेकिन हमेशा मेडिसिन लेना ठीक नहीं होता। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय अपनाकर माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

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माइग्रेन के दर्द से निजात पाने के लिए दूर्वा (दूव) घास काफी फायदेमंद है। दूव को लोग केवल पूजा पाठ के लिए समझते हैं। जबकि माइग्रेन के लिए यह काफी कारगर औषधी के रूप में जाना जाता है। माइग्रेन को दूर करने के लिए मुट्ठीभर दूर्वा घास को मिक्सर में डालकर अच्छे से पीस कर उसका रस निकाले। इसके बाद इस रस में एक चुटकी मुलैठी पाउडर को डालकर अच्छी तरह से मिला लें। माइग्रेन से पीड़ित दोपहर में इसका सेवन करें। एक महीने तक लगातार इसके पानी को पीने से इसका फायदा आपको दिखने लगेगा। ऐसा करने से धीरे-धीरे आपकी माइग्रेन की समस्या कम हो जाएगी।

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