Poem: सोचो! और विचार करो
बृजेंद्र क्या योगदान तुम्हारा है। सर्वोच्च ज्ञान सम्पदा पूर्ण फिर भारत क्यों हारा है।। भारत कटता छटता रहा हम रहे सिकुड़ कर मौन। इसका अपराधी कौन है सोचो! है उत्तरदायी…
बृजेंद्र क्या योगदान तुम्हारा है। सर्वोच्च ज्ञान सम्पदा पूर्ण फिर भारत क्यों हारा है।। भारत कटता छटता रहा हम रहे सिकुड़ कर मौन। इसका अपराधी कौन है सोचो! है उत्तरदायी…
मेघ जब बागन में बरसें, ताल में जीवन रस भर दे। मयूरी नाचे वन उपवन, मेघ जब मोतिन सा बरसे। मिटे तब धरती माँ की प्यास, पुराये गंगा की तब…
वर्षा जल खुद राह बनाए, जाने को तालाब में। बाधा कोई आ न जाए, इस मिलन की राह में। इतनी चिंता हमको करनी, अबकी वर्षाकाल में। भर जाएं जब ताल…
होली आई प्रेम के। लिए अनेक रंग।। करना है क्या जानिए। इस होली के संग।। भेदभाव सब छोड़िए। मलिए रंग गुलाल।। सत्य सनातन के लिए। आया पुनः सुकाल।। ऊंच नीच…
नये वर्ष की बेला आयी। उर में नई चेतना लायी। कैसा लगता सुखद प्रभात। खुशियों की होती बरसात। वर्मा हुआ तिमिर का नाश। सबके अधरों पर उल्लास। नया वर्ष हर…
ईसा सतगुरु खुदा बुद्ध अब, सुन लो हे भगवान। मांग रहा हूं दे दो सबको, पहले सी मुस्कान।। रोये-रोये सभी यहां हैं, नहीं कहीं उल्लास। सांसे होती बंद देख कर,…
जिंदगी के हर मुकाम में है वो जीती। कभी नहीं वो हारी है।। कभी दुर्गा, लक्ष्मी कभी वो मां काली। अनेक रूप है उसके वो एक नारी है।। कभी लक्ष्मी…