Kavita: आओ पुनः जगाएं भारत को
जिनकी रगों में रक्त सनातन जिनके पूर्वज थे ऋषि हमारे, जो भय लोभ से बने विधर्मी हैं फिर भूले संस्कार वे सारे। भूले बिसरे रहे अभी तक मर्यादायें भी सब…
जिनकी रगों में रक्त सनातन जिनके पूर्वज थे ऋषि हमारे, जो भय लोभ से बने विधर्मी हैं फिर भूले संस्कार वे सारे। भूले बिसरे रहे अभी तक मर्यादायें भी सब…
लहू पीने की आदत हो गई है सियासत एक लानत हो गई है शरीफों की कहां दुनिया बची है जहां में अब शराफ़त खो गई है थी कुदरत ने हमें…
मेघ जब बागन में बरसें, ताल में जीवन रस भर दे। मयूरी नाचे वन उपवन, मेघ जब मोतिन सा बरसे। मिटे तब धरती माँ की प्यास, पुराये गंगा की तब…
वर्षा जल खुद राह बनाए, जाने को तालाब में। बाधा कोई आ न जाए, इस मिलन की राह में। इतनी चिंता हमको करनी, अबकी वर्षाकाल में। भर जाएं जब ताल…