प्रथम नवसंवत्सर का प्रथम आलोक

नवसंवत्सर का स्वागत। काल सुंदर रथ पर सवार है। यह हर बरस मधुमय नवसंवत्सर लाता है। काल सर्वशक्तिमान देवता हैं। अथर्ववेद (9-53) के ऋषि भृगु ने उनकी महिमा गायी है,…

नव वर्ष प्रतिपदा सिंह द्वार

नव वर्ष प्रतिपदा सिंह द्वार संकल्प से सिद्धि तक जाना है। हो सशक्त समृद्ध सनातन वसुधा को परिवार बनाना है।। हों कहीं गुलामी के शूल दंश चुन चुन सब शूल…

Poem: प्रकृति भी रंग पसारे है

प्रकृति भी रंग पसारे है, नववर्ष तुम्हारा आलिंगन! फसलें भी स्वर्ण सरीखी सी, आतुर हैं आने को आंगन। जो बीत गईं वो यादें हैं, आएंगी वो है नव जीवन! बीतीं…

Poem: अब हम सब अपना नववर्ष मनाएंगे

चारों तरफ नए साल का, ऐसा मचा है हो-हल्ला। धरती ठिठुर रही सर्दी से, घना कुहासा छाया है। कैसा ये नववर्ष है, जिससे सूरज भी शरमाया है।। सूनी है पेड़ों…

Kavita: नववर्ष द्वार है खड़ा तुम्हारे

नववर्ष द्वार है खड़ा तुम्हारे, प्रकृति ने उसे सजाया है। है पृथ्वी का प्राकट्य दिवस, जग को बतलाने आया है।। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर्व, श्री सम्पदा साथ में लाया है।…