Poem: देख सजनी! देख ऊपर
देख सजनी! देख ऊपर।। आ रही है मेघमाला।। बम सरीखी गड़गड़ाती,रेल जैसी दड़दड़ाती। इंजनों सी धड़धड़ाती, फुलझड़ी सी तड़तड़ाती।। पल्लवों को खड़बड़ाती,पंछियों को फड़फड़ाती। पड़पड़ाती पापड़ों सी, बोलती है कड़कड़ाती।।…
देख सजनी! देख ऊपर।। आ रही है मेघमाला।। बम सरीखी गड़गड़ाती,रेल जैसी दड़दड़ाती। इंजनों सी धड़धड़ाती, फुलझड़ी सी तड़तड़ाती।। पल्लवों को खड़बड़ाती,पंछियों को फड़फड़ाती। पड़पड़ाती पापड़ों सी, बोलती है कड़कड़ाती।।…