शिवपाल यादव सशर्त सपा में पार्टी के विलय को तैयार, अखिलेश की मंजूरी का इंतजार

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Shivpal Singh Yadav

प्रकाश सिंह

UP Election: यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव इस समय परिवर्तन रथ यात्रा के जरिए बड़ा परिवर्तन करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में वह आज सामाजिक परिवर्तन रथ यात्रा लेकर गोरखपुर पहुंचे हुए थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला भी बोला। उन्होंने बीजेपी पर जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की सरकार ने जनता से जो वादे किए थे एक भी पूरे नहीं किए। उन्होंने कहा कि देश में अभी तक न तो कालाधन आया और न ही नोटबंदी और जीएसटी को कोई फायदा ही नजर आ रहा है। मंहगाई अलग से चरमपर पहुंच गई है। मंहगाई के चलते जनता काफी परेशान है वह भाजपा सरकार से मुक्ति चा​हती है।

शिवपाल यादव ने कहा कि वह भाजपा को हराने के लिए किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कहेंगे तो गठबंधन ही नहीं, बल्कि पार्टी का सपा में करने को तैयार हैं। शिवपाल सिंह यादव के इस बयान से यह साफ हो रहा है कि वह सपा कुनबे का हिस्सा बनना चाह रहे हैं, क्योंकि सामाजिक परिवर्तन रथ यात्रा के दौरान वह कई बार इस तरह के बयान दे चुके हैं। मगर अखिलेश यादव की तरफ से उन्हें हरी झंडी नहीं मिल पा रही है।

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हाल के दिनों में मीडिया के सवाल पर शिवपाल सिंह यादव ने कहा था कि अखिलेश यादव उनके नेताओं का अगर सम्मान करेंगे तो वह सपा में पार्टी का विलय करने को तैयार हैं। सूत्रों की मानें तो शिवपाल की सपा में वापसी को लेकर मुलायम सिंह भी तैयार हैं, लेकिन अखिलेश यादव नहीं चाहते कि पुरानी यादें फिर से ताजा हों। शिवपाल के सपा में आने से अखिलेश यादव पर फिर अंकुश लगने लगेगा। पार्टी में कोई फैसला लेने से पहले उन्हें चाचा शिवपाल से राय लेनी पड़ेगी।

उधर शिवपाल भी अपनी स्वतंत्रता को लेकर अड़ेंगे। क्योंकि पार्टी के कई दिग्गज नेता शिवपाल सिंह यादव का साथ देते हुए बगावती तेवर अपनाए थे। ऐसे में अखिलेश यादव उन नेताओं को दोबारा पार्टी में लाने से हिचक रहे हैं। फिलहाल राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो बिना सपा कुनबे के एक हुए बीजेपी के विजय रथ को रोकपाना आसान नहीं है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि जिस चाचा को अखिलेश यादव ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था, उन्हें फिर से ससम्मान पार्टी में लाएंगे।

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