UP Election 2022: आगामी चुनाव में भाजपा के लिए पट्टी विधानसभा में कमल खिलाना आसान नहीं

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UP Election 2022

गौरव तिवारी

पट्टी विधानसभा में ब्राह्मण-कुर्मी मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक

जवाहर लाल नेहरू ने 1920 में आंदोलन में लिया था हिस्सा लिया

UP Election 2022: यूपी विधानसभा (UP Election 2022) का चुनाव काफी रोमांचक होने वाला है, क्योंकि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) की अपेक्षा इसबार मोदी लहर काफी धीमी हो चुकी है। मोदी लहर में वे नेता भी विधायक चुन लिए गए थे, जिनको क्षेत्र की जनता ज्यादा जानती-पहचानती नहीं थी। लेकिन इस बार विधायकों को अपने काम के बदौलत मैदान मारना है। हालांकि भाजपा ने ऐसे विधायकों के सर्वे कराकर टिकट काटने की तैयारी में हैं, यही वजह है कि ऐसे लोग भाजपा छोड़कर दूसरे दलों में अपनी जगह तलाश रहे हैं। वहीं बात की जाए पट्टी विधानसभा (Patti Vidhan Sabha) की तो यहां की जनता भी वर्तमान विधायक से कुछ ज्यादा संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। आइए जानते हैं पट्टी विधानसभा का इतिहास…

2017 के चुनाव में मोती सिंह जीते

योगी सरकार में मोती सिंह कैबिनेट मंत्री बने। यूपी विधानसभा में पट्टी विधानसभा (Patti Vidhan Sabha) सीट (249) का अपना महत्व है और यह सीट प्रतापगढ़ जिले में पड़ती है। यह वही क्षेत्र है जहां पर करीब 100 साल पहले पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपनी राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की थी।

पट्टी विधानसभा (Patti Vidhan Sabha) सीट पर 2002 से 2012 तक बीजेपी का कब्जा

भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) का अभेद्य किला बना रहा, लेकिन 2012 के चुनाव में डकैत ददुआ के भतीजे और सपा के पूर्व सांसद के बेटे राम सिंह ने भाजपा के किले में सेंध लगाते हुए राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह को 157 वोटों के मामूली अंतर से हरा दिया था। हालांकि 2017 के चुनाव में मोती सिंह फिर से काबिज हो गए। पट्टी विधानसभा का इतिहास (History of Patti Vidhan Sabha) आजादी के आंदोलन के शुरुआती दिनों की याद दिलाता है। यहीं से राजनीति का कहरा सीखकर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी राजनीति का श्री गणेश किया। जब 1920 में पट्टी आए और किसान आंदोलन में हिस्सा लिया।

किसान आंदोलन से जुड़ा है इतिहास

जैसे बेल्हा क्षेत्र आंवले की खेती के लिए मशहूर माना जाता है। उसी प्रकार से पट्टी विधानसभा किसान आंदोलन के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा हुआ है। पट्टी तहसील से पूरब की दिशा में 4 किलोमीटर दूर स्थित शहीदी स्मारक रूर किसान आंदोलन की शहादत का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

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सबसे अधिक ब्राह्मण और कुर्मी मतदाता

पट्टी तहसील मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। जोकि पड़ोसी जनपद जौनपुर से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर अवधी भाषा बोली जाती हैं। मुंबई जाने के लिए प्रतापगढ़ से उद्योग नगरी और साकेत एक्सप्रेस चलाई जाती है। पट्टी विधानसभा में ब्राह्मण और कुर्मी मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, तो वहीं यादव और क्षत्रिय बराबर की संख्या में हैं।

कैबिनेट मंत्री मोती सिंह का हमेशा रहा दबदबा

पट्टी विधानसभा को प्रतापगढ़ जनपद की एक हाईप्रोफाइल सीट मानी जाती है। विधानसभा सीट पड़ोसी जनपद जौनपुर से सटा हुआ है, यहां पर हमेशा भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह का दबदबा रहा है। दूसरे दलों ने हमेशा यहां पर अपना असर दिखाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे।

2012 में सपा से राम सिंह पटेल बने विधायक

हालांकि 2012 में पहली बार समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे कुख्यात ददुआ के भतीजे राम सिंह पटेल ने यहां पर मामूली अंतर से राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह को शिकस्त दी थी। लेकिन 2017 के चुनाव में फिर से राजेंद्र प्रताप सिंह ने मामूली अंतर से जीत हासिल की। अब 2022 के चुनावी संग्राम में यहां पर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच में चुनावी संग्राम होने की संभावना जताई जा रही है।

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2002 के नतीजे

वर्ष 2002 का चुनाव परिणाम राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह के पक्ष में रहा। उन्होंने उस समय बसपा पार्टी के मृत्युंजय शुक्ला को करारी शिकस्त दी थी। अपना दल के विजय सिंह तीसरे स्थान पर रहे, जबकि सपा पार्टी के प्रत्याशी राम लखन चौथे स्थान पर खिसक गए।

मोती सिंह यहां से 4 बार विधायक रहे

2007 में 15वीं विधानसभा में राजेंद्र प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी के बाल कुमार पटेल को बेहद मामूली अंतर से हराया, जबकि बीएसपी से चुनाव लड़ रहे कुंवर शक्ति सिंह तीसरे स्थान पर चले गए। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के चंद्रबली चौथे स्थान पर रहे हैं।

2012 में 16वीं विधानसभा चुनाव में सपा पार्टी के राम सिंह ने बीजेपी के राजेंद्र प्रताप सिंह को मामूली अंतर से शिकस्त दे पाने में सफल रहे। बीएसपी की अर्चना देवी तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि कांग्रेस के अजीत प्रताप सिंह चौथे स्थान पर रहे। 2012 के चुनाव में कुल 190311 मत पड़े थे। विजयी प्रत्याशी राम सिंह पटेल को 61434 मत तथा उप विजेता बीजेपी के राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह को 61278 मत मिले।

2017 का विधानसभा चुनाव रोमांचक रहा

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने कुल 75011 मत प्राप्त किए, जबकि राम सिंह को 73538 मत मिले। बसपा पार्टी के कुंवर शक्ति सिंह को 46427 वोट मिले। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल चौथे स्थान पर रहे, जिसने 3025 मत प्राप्त किए।

इसबार मतदाताओं में वर्तमान मंत्री के प्रति दिख रही नाराजगी

इस बार पट्टी की जनता में वर्तमान कैबिनेट मंत्री के प्रति कुछ नाराजगी देखने को मिल रही है। वह उनके 5 साल के कार्यकाल से कुछ अधिक खुश नहीं दिख रहे है। यह सब बातें भाजपा हाईकमान को भी सर्वे कराने पर मिल रही हैं। इसलिए भाजपा हाईकमान पट्टी विधानसभा में काफी मंथन के बाद प्रत्याशी उतारने के मूड में है। इस बार हो सकता है अपना दल के खाते में पट्टी विधानसभा सीट दे दी जाए। अभी तक भाजपा ने प्रतापगढ़ में किसी को भी प्रत्याशी नहीं बनाया है। जल्द हाईकमान प्रत्याशियों की घोषणा कर सकता है। देखना है कि हाईकमान वर्तमान कैबिनेट मंत्री पर फिर से भरोसा जताता है, या फिर किसी और को प्रत्याशी घोषित करता है।

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जनसत्ता दल पार्टी भी लड़ाएगी प्रत्याशी

राजा भैया की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी इस बार यूपी में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने के मूड में है।लेकिन अभी तक प्रतापगढ़ में केवल 2 सीटों पर ही घोषणा कर पाई है कुंडा और बाबागंज। अभी 5 विधानसभा सीटों पर घोषणा होना बाकी है। जल्दी ही पार्टी पांचों विधानसभाओं में प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती है।

बसपा ने खेला है ब्राम्हण कार्ड

बहुजन समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशी की घोषणा पट्टी विधानसभा में कर दी है फूलचंद्र मिश्रा को इस बार बसपा ने मैदान में उतारा है। फूलचंद मिश्रा के आने से ब्राह्मण मतदाताओं के वोट बसपा की ओर जा सकते हैं। भाजपा को नुकसान हो सकता है। सपा,जनसत्ता दल और भाजपा के प्रत्याशी घोषणा होने के बाद ही कुछ तस्वीरें साफ हो सकती है। जल्दी सभी पार्टियां अपनी प्रत्याशियों को मैदान में उतार सकती हैं।इस बार पट्टी का चुनाव काफी दिलचस्प होगा।

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