आभासी दुनिया की हकीकत और आशंकाएं

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Social Media

डॉ. सुरभि पांडे

क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि कोई गाड़ी छह-सात घंटे के लिए अचानक से खराब हो जाए, जिसमें लाखों-करोड़ों लोग यात्रा पर निकले हों। और यह खराबी अनिश्चितकाल के लिए हो, समस्या का आता पता न चल पाए। वीरान, अंधेरी रात में असहाय, निरीह इंसान क्या करे? कैसी-कैसी चिंताओं से लोग घिर जाएंगे? दहशत, शंका, आर्थिक, मानसिक और व्यापारिक क्षति को लेकर लोग तनाव में जा सकते हैं। शायद यह एक कोरी कल्पना है। परन्तु फेसबुक, इंस्टाग्राम, मेसेंजर और व्हाट्सएप जैसे माध्यम से जुड़े लोगों के लिए रात 4 अक्टूबर 2021 को ऐसा ही कुछ हो गया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वाट्सऐप (Whatsapp), फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) दुनिया भर में अचानक डाउन हो गया। रात नौ बजे के बाद तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अचानक से बंद हो गए, जिससे उपभोगताओं को न सिर्फ परेशानी का सामना करना पड़ा बल्कि अनेक अशंकाओं ने घेर लिया। ज्ञात हो कि अमेरिकी कंपनी फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने माफी माँगते हुए लोगों से अपील भी की, जिसमें उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि कुछ लोगों को फेसबुक ऐप एक्सेस करने में समस्या हो रही है। हम चीजों को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए काम कर रहे हैं, और किसी भी असुविधा के लिए हम क्षमा चाहते हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि यह छह घंटे में दुरुस्त कर लिया गया। वैश्वीकरण के दौर मे दुनिया के छोटे-बड़े, अमीर-गरीब मुल्क के लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप से न सिर्फ जुड़े हुए हैं बल्कि बहुतों की तो यह एक अलग ही दुनिया सी हो गयी है। जिसे तकनीकी भाषा में आभाषी या ‘वर्चुअल वर्ड’ कहते हैं। चाहे व्यक्तिगत अथवा सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम हो या फिर राजनीतिक सक्रियता, हमारी जिदंगी इन सोशल साइट्स के बिना असंभव सी प्रतीत होती हैं। यहाँ तक कि व्हाट्सएप जैसी तकनीक का प्रयोग सरकारी कामकाज के साथ-साथ शिक्षा और व्यापार में व्यपापक स्तर पर शुरू हो चुका है।

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जैसे ही ये साइट्स बंद हुईं, लोगों को एक अलग तरह की चिंता सताने लगी। कुछ लोगों को लगा कि उनका अकाउंट ही हैक हो गया है। साइबर-सुरक्षा और लोगों की निजता का सवाल पहले ही दुनिया भर में बहस का मुद्दा बना हुआ है। उपभोक्ता के व्यक्तिगत डेटा की चोरी और उसकी बिक्री को लेकर पहले भी फेसबुक सहित अन्य कंपनियों पर सवाल उठाये जा चुके हैं। दुनिया के हिस्सों में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता रही है। वहां पर सरकारों ने हमेशा इन सोशल साइट्स को कुछ समय के लिए बंद करती रही हैं। सैनिक और तानाशाही निजाम जहाँ हैं, क्या वहां के नागरिक सैनिक तख्ता पलट या ऐसी ही किसी अनहोनी घटना की आशंका से सिहर न गए होंगे?

सोशल मीडिया ने 2019 के बाद से यह सबसे बड़ा आउटेज पहली बार देखा है, जब फेसबुक और इसकी सेवाएं लगभग 6 घंटे तक बंद रहीं। फेसबुक ने “दोषपूर्ण कॉन्फ़िगरेशन परिवर्तन” को दोषी ठहराया। तकनीकी भाषा में समझें तो हमें पता चलता है कि यह आउटेज ‘डोमेन नेम सिस्टम’ (DNS) के साथ एक समस्या के कारण था। मतलब एक तकनीकी समस्या, जिसने कंपनी के 3.5 बिलियन उपयोगकर्ताओं को अपने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और मैसेंजर जैसी मैसेजिंग सेवाओं तक पहुंचने से रोक दिया।

जुकरबर्ग और कंपनी के अधिकारियों द्वारा यह निश्चित किया गया कि यह समस्या अंदरूनी तकनीकी खराबी की वजह से हुई है। बाहरी कारणों को खारिज करते हुए उन्होंने ने उपभोगताओं को आश्वस्त किया कि निजता और व्यक्तिगत सूचनाओं के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया कि उपभोगकर्ता के डेटा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हुई है।

हालांकि कंपनी और उसके अधिकारियों की तरफ से स्पष्टीकरण आ चुका है। लेकिन अभी भी लोग बहुत सारे कयास लगा रहे हैं। वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा का भी सवाल है, क्योंकि इसकी वजह से कंपनी का घाटा सात बिलियन यानी सात अरब अमरीकी डॉलर आंका जा चुका है। वहीं दूसरी तरफ आउटेज के बाद फेसबुक के शेयरों में लगभग 5% की गिरावट भी आ गई।

ब्रिटेन, इटली, अमेरिका, जर्मनी और अन्य देशों में वोडाफोन, टी-मोबाइल और वेरिज़ोन सेवा प्रदाताओं जैसी कंपनियों में भी व्यवधान देखने को मिला। ये समस्याएँ मुख्य रूप से सेल फ़ोन या गेमिंग ऐप्स और अन्य साइटों पर इंटरनेट उपयोग को लेकर दिखीं जहाँ पर फेसबुक को लॉग-इन करने के लिए उपयोग किया जाता है। इस हालात में लोग अजीब सी पशोपेश की स्थिति में आ गए। कुछ लोगों को लगा शायद उनका नेट पैक खत्म हो गया है। कई लोगों को लगा की इंटरनेट की समस्या की वजह से नेट नहीं चल रहा है। कुछ लोग तो अपने फोन को स्विच ऑफ करके फिर से स्टार्ट करने लगे। संभवतः ऐसी स्थिति कभी-कभार ही आती है, जब वह एक वैश्विक समस्या बन जाए। मतलब एकदम ग्लोबल पंडेमिक जैसी स्थिति जैसे कोरोना महामारी और लॉकडाउन के उपरांत दुनिया का बड़ा हिस्सा अचानक से ठहर और कट सा गया था।

जानकारी के अनुसार, फेसबुक आउटेज दुनिया के एक बहुत बड़े आउटेज के रूप में सामने आया जहाँ 10.6 मिलियन लोगों ने रिपोर्ट दर्ज करायी। दरअसल हुआ यह कि हर उपभोगता की साइट्स पर त्रुटि संदेश अचानक से दिखने लगा। मसलन व्हाट्सअप web.whatsapp.com, त्रुटि संदेश को प्रदर्शित करता दिखा– 5xx सर्वर त्रुटि। साथ ही साथ इंस्टाग्राम भी यही दिखाने लगा– 5xx सर्वर त्रुटि संदेश। मेसेंजर और फेसबुक पर भी ऐसे त्रुटि संदेश बार-बार देखे गए ।

बहुत सारे लोग जो ट्विटर जैसी सोशल साइट्स पर नहीं थे वह ट्विटर पर अपना अकाउंट खोल लिए। भारत में उसी समय ट्विटर पर “#फेसबुकडाउन”, “#व्हाट्सएपडाउन” और “#इंस्टाग्रामडाउन” ट्रेंड भी करने लगे। क्या उपर्युक्त सोशल साइट्स के खिलाफ कोई साजिश है जिससे इसकी विश्वसनीयता को कम किया किया जा सके?

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फेसबुक के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बावजूद कयास और आशंकाएं कम नहीं हो रहीं हैं। इसके मूल में तकनीकीकरण और उसके भविष्य की चिंताएं भी है। हलाकि आधुनिक तकनीक ने दुनिया का कायाकल्प ही कर दिया है। आज हम आर्टिफिसियल इंटेलीजेन्स और ब्लॉकचेन तकनीकी की तरफ बढ़ चुके हैं। बिटक्वाइन और क्रिप्टोकरेंसी जैसी खोज से दुनिया रूबरू हो चुकी है। बदलती दुनिया में अपराध भी नए स्वरूप में बहुत तेजी से बदल रहें हैं। ऑनलाइन फ्रॉड, हैकिंग, बायोलॉजिकल वेपन और साइबर हमले भी बढे हैं जिसको लेकर दुनिया अभी तैयार नहीं है। लोगों की निजी जिंदगी को आज तकनिकी से कंट्रोल किया जा रहा है। तरह-तरह के सर्विलांस भी किए जा रहें हैं। प्रकृति से बढ़ती दूरी और मशीनों पर पूर्ण निर्भरता कहीं मानव सभ्यता पर भारी न पड़ जाए। ये भी ख्याल रखना बहुत जरूरी है।

(लेखिका असिस्टेंट प्रोफेसर हैं)
(यह लखिका के निजी विचार हैं)

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