पुष्य नक्षत्र की विशेष घड़ी में विद्या भारती के बच्चों को पिलाई गई आयुर्वेदिक ड्राप सुवर्ण प्राशन

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लखनऊ: कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषांगिक संगठन आरोग्य भारती ने सुवर्ण प्राशन (आयुर्वेदिक इम्युनाइजेशन) महाअभियान शुरू किया। यह महाअभियान रवि पुष्य नक्षत्र की विशेष घड़ी में विद्या भारती के कई परिसरों अलीगंज, जानकीपुरम्, तकरोही, राजाजीपुरम, मॉडल हाउस, निरालानगर, इंदिरानगर, गोलागंज, पटेल नगर, पीजीआई, क्ले स्क्वायर, अर्जनगंज और महामना शिक्षण संस्थान में आयोजित किया गया, जिसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के हजारों बच्चों को आयुर्वेदिक ड्रॉप सुवर्ण प्राशन पिलाई गई। इसके साथ ही बच्चों का ब्लड टेस्ट भी किया गया। यह कार्यक्रम अगले कई वर्षों तक निरंतर प्रति माह पुष्य नक्षत्र के दिन चलाया जाएगा।

बच्चों की सुरक्षा के लिए आयुर्वेदिक इम्युनाइजेशन का लें सहारा: स्वाती सिंह

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सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माघ्यमिक विद्यालय सेक्टर क्यू, अलीगंज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाल विकास एवं पुष्टाहार विकास मंत्री स्वाती सिंह ने कहा कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बाद अब तीसरी लहर की भी आशंका व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस लहर का असर बच्चों पर ज्यादा होगा, ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों पर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, उस स्थिति में हमें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए आयुर्वेदिक इम्युनाइजेशन का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान को पूरे देश में शुरू किया जाना चाहिए, जिसके लिए जनजागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने आरोग्य भारती से सरकार के साथ मिलकर अभियान चलाने का आग्रह भी किया है।

इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर है सुवर्ण प्राशन: डॉ एमएलबी भट्ट

आरोग्य भारती अवध प्रांत के अध्यक्ष डॉ. एमएलबी भट्ट ने आयुर्वेदिक औषधि सुवर्ण प्राशन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जन्म से 16 वर्ष की उम्र तक के बच्चों को ड्रॉप के माध्यम से औषधि दी जाती है, जिससे काफी सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि पुष्य नक्षत्र की विशेष घड़ी में बच्चों को पिलाई गई आयुर्वेदिक ड्रॉप स्वर्णप्राशन उन्हें विलक्षण प्रतिभावान बनाएगी। साथ ही बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर विकृतियों को दूर देती है। उन्होंने कहा कि सुवर्ण प्राशन कोरोना ही नहीं बल्कि सार्वत्रिक, सार्वभौमिक ग्लोबल वैक्सीन है, जो सभी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि स्वर्णप्राशन संस्कार का उल्लेख कश्यप संहिता में भी है और यह प्राचीन समय से चला आ रहा है।

पुराने समय माता-पिता अपने बच्चे के जन्म लेने के बाद जीभ पर सोने की सिलाई शहद चटाते थे, लेकिन अब यह संस्कार विलुप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले आरोग्य भारती और केजीएमयू के संयुक्त प्रयास से गोरखपुर में जेई और एई से सबसे ज्यादा प्रभावित पांच गांवों को गोद लिया था, यहां करीब एक हजार बच्चों को सुवर्ण प्राशन की खुराक प्रयोग के रूप में दी गई थी। इस प्रयोग के बाद वहां एक भी बच्चा एई और जेई से संक्रमित नहीं हुआ है, बल्कि लगभग सभी बच्चों में हीगोग्लोबिन की मात्रा में बढ़ोतरी हुई।

विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र ने कोरोना संकट के समय में आरोग्य भारती की ओर से विद्या भारती के बच्चों को सुवर्ण प्राशन (आयुर्वेदिक इम्युनाइजेशन) की खुराक पिलाने के कार्यक्रम को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रचीन चिकित्सा पद्धति है, जो प्रयोग सिद्ध विधि है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ने समर्थ भारत नाम से प्रयोग शुरू किया है, जिसके काफी सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रयोग पूरे देश में शुरू हो ताकि हमारा समाज स्वस्थ रहे और देश का नाम रौशन करे। उन्होंने कहा कि करीब चार हजार बच्चों पर ये प्रयोग शुरू किया गया ताकि बच्चे स्वस्थ, प्रसन्न और मेधा प्रसन्न रहें।

बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है सुवर्ण प्राशन: बृजेश पाठक

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वहीं, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज निरालानगर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न्याय एवं विधायी मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि स्वर्णप्राशन रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही शरीर से अनेक प्रकार के विषैले पदार्थों को दूर करता है। उन्होंने कहा कि याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है, जिससे अध्ययनरत बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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सरस्वती बालिका विद्या मंदिर जानकीपुरम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीजेपी विधायक नीरज बोरा ने कहा कि सुवर्ण प्राशन शिशु के बल, बुद्धि और आयुष्य को बढ़ाता है। इस आयुर्वेदिक औषधि के द्वारा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। कार्यक्रमों में आये सभी अतिथियों पर परिचय प्रधानाचार्यों ने कराया और आभार प्रबंधक ने व्यक्त किया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में विद्या भारती की ओर से उपाध्यक्ष रामकृष्ण चतुर्वेदी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय हेमचंद्र, बालिका शिक्षा प्रमुख उमाशंकर मिश्रा, क्षेत्रीय मंत्री डॉ. जय प्रताप सिंह, प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्रा, भारतीय शिक्षा शोध परिषद के सचिव दिनेश सिंह, अवध प्रांत के प्रदेश निरीक्षक राजेन्द्र, शिशु शिक्षा प्रबंध समिति के मंत्री डॉ. शिवभूषण, शिशु शिक्षा समिति अवध प्रांत के अध्यक्ष बाबूलाल, अवध प्रांत के परीक्षा प्रमुख अवधेश, सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश और आरोग्य भारती की ओर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. बीएन सिंह, अवध प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ. विनोद जैन, प्रान्त सचिव वैद अभय नारायण तिवारी, प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य एवं आंकेराइट आयुर्वेद कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. इंद्रेश सिंह, डॉ. कुबेर गिरी, डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. अजीत प्रताप सिंह, डॉ. विभा रानी रत्ना, डॉ. कौस्तुभ मनी त्रिपाठी, डॉ. रजनीश, डॉ. रवि शुक्ला, डॉ. अम्बिका पाण्डेय, डॉ. मुरली मनोहर अनुरागी, डॉ. गौरव शर्मा, डॉ. अविनाश कुमार सिंह, डॉ. सत्यप्रकाश चौहान, डॉ. स्वप्निल जी सहित कई गण्मान्य लोग उपस्थित रहे।

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