पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को राष्ट्र को समर्पित कर बोले पीएम मोदी, उत्तर प्रदेश की शान है

0
63
Purvanchal Expressway ka Inauguration

सुल्तानपुर: लखनऊ से गाजीपुर तक पहुंचने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का पीएम मोदी ने उद्घाटन कर राष्ट्र को समर्पित कर दिया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने के लिए पीएम मोदी वायुसेना के विमान सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से सुल्तानपुर पहुंचे। यहां उनका गर्मजोशी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल अनंदी बेन पटेल भी मौजूद थीं। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन समारोह कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी को अयोध्या राम मंदिर की एक मूर्ति भी भेंट की। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन कर राष्ट्र को समर्पित किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दुनिया में जिन्हें भी उत्तर प्रदेश के सामार्थ्य पर संदेह हो वो यहां आकर हकीकत देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले जब इस एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया था तो यह नहीं सोचा था कि एक दिन उसी एक्सप्रेस वे पर विमान से लैंड करूंगा। यह एक्सप्रेस वे उत्तर प्रदेश को तेज गति से भविष्य की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेस वे विकास, प्रगति और नए उत्तर प्रदेश के निर्माण का एक्सप्रेस वे साबित होगा। यह एक्सप्रेस वे उत्तर प्रदेश की दूढ़ इच्छाशक्ति को पूरी करने में कददगार सामित होगा। उत्तर प्रदेश के संकल्पों को जीता जागता प्रमाण यह एक्सप्रेस वे है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे उत्तर प्रदेश की शान है।

बता दें कि लखनऊ से गाजीपुर तक जाने वाला यह पूर्वांचल एक्सप्रेस वे प्रदेश के 9 जिलों को जोड़ते हुए विकास का नया आयाम गढ़ेगा। इसकी लंबई करी 341 किमी है। इसी के साथ यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे है। इसकी लागत करीब 22,500 हजार करोड़ रुपए है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई, 2018 में रखी थी। गौरतलब है कि उद्घाटन के दो दिन पहले रविवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर सुखोई-मिराज जैसे लड़ाकू विमानों को अभ्यास भी हुआ था। इसके साथ ही एयर स्ट्रिप पर वायुसेना का सी-130 जे हरक्यूलिस विमान भी उतारा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इसी विमान से सुल्तानपुर पहुंचे हैं।

इसे भी पढ़ें: कैलाश से कन्याकुमारी तक का भारत हमारा

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here